पटना | बिहार में बच्चों के बढ़ते स्क्रीन टाइम और सोशल मीडिया उपयोग को नियंत्रित करने के लिए सरकार नई नीति लाने की तैयारी कर रही है। विधानसभा सत्र के दौरान उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस विषय पर बेंगलुरु स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंसेज (निमहांस) से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। प्रश्नकाल के दौरान जनता दल (यूनाइटेड) के विधायक समृद्ध वर्मा ने यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि बच्चे अनंत स्क्रॉलिंग में फंस जाते हैं, जो एक अदृश्य महामारी की तरह है। उन्होंने स्कूलों में ‘डिजिटल हाइजीन’ को पाठ्यक्रम में शामिल करने की मांग भी की। सरकार का मानना है कि अत्यधिक स्क्रीन टाइम बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है। इसी को देखते हुए नीति के जरिए मोबाइल और सोशल मीडिया के संतुलित उपयोग पर दिशा-निर्देश तय किए जाएंगे। हाल ही में डेनमार्क में हुई एक स्टडी में सामने आया कि जब बच्चों का स्क्रीन टाइम 70 प्रतिशत तक घटाया गया, तो केवल दो हफ्तों में उनके व्यवहार में सकारात्मक सुधार देखने को मिला। बिहार सरकार का उद्देश्य इसी तरह बच्चों को डिजिटल लत से बचाकर स्वस्थ और संतुलित जीवन की ओर प्रेरित करना है।

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