भारत की आधुनिक शिक्षा व्यवस्था के निर्माण में मुस्लिम समाज और उसके विद्वानों का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। देश की कई प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटियों की स्थापना मुसलमानों ने की, जिन्होंने न केवल शिक्षा का प्रसार किया बल्कि भारत को वैज्ञानिक, प्रशासक, राजनेता और स्वतंत्रता सेनानी भी दिए। इन्हीं संस्थानों ने भारत को परमाणु शक्ति बनाने, इसरो और नासा जैसे संस्थानों में वैज्ञानिक देने में बड़ी भूमिका निभाई।
इस सूची में पहला नाम अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) का आता है। इसकी स्थापना 1875 में सर सैयद अहमद खान ने की थी। करीब 1155 एकड़ में फैली यह यूनिवर्सिटी आज 300 से अधिक विषयों में शिक्षा देती है। यहां 2000 से अधिक शिक्षक और 5000 से ज्यादा कर्मचारी कार्यरत हैं। एएमयू को देश के सर्वश्रेष्ठ शिक्षण संस्थानों में गिना जाता है। भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. जाकिर हुसैन, हामिद अंसारी, क्रांतिकारी मौलाना हसरत मोहानी, खान अब्दुल गफ्फार खान और पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री अयूब खान इसी विश्वविद्यालय के छात्र रहे हैं। नवाब मीर उस्मान अली द्वारा दिया गया आर्थिक सहयोग भी इसके विकास में अहम रहा।
दूसरे स्थान पर जामिया मिलिया इस्लामिया है, जिसकी स्थापना 1920 में मौलाना मोहम्मद अली जौहर और मौलाना महमूद उल हसन ने की थी। आज यह 254 एकड़ में फैली हुई है और यहां 20 हजार से अधिक छात्र पढ़ते हैं। जामिया ने स्वतंत्रता आंदोलन में भी अहम भूमिका निभाई। 2020 में भारत सरकार ने इसे देश की नंबर वन यूनिवर्सिटी का दर्जा दिया। अभिनेता शाहरुख खान जैसे कई प्रसिद्ध लोग इसके छात्र रहे हैं।
तीसरे नंबर पर उस्मानिया यूनिवर्सिटी है, जिसकी स्थापना 1918 में हैदराबाद के नवाब मीर उस्मान अली ने की थी। यह भारत की पहली यूनिवर्सिटी थी, जहां उच्च शिक्षा उर्दू माध्यम में शुरू की गई। करीब 1600 एकड़ में फैली यह यूनिवर्सिटी आज भी भारत के सबसे बड़े शिक्षण संस्थानों में गिनी जाती है। इन विश्वविद्यालयों ने न केवल शिक्षा दी, बल्कि भारत के सामाजिक, वैज्ञानिक और राजनीतिक विकास में ऐतिहासिक योगदान दिया।
