जयपुर। डिजिटल युग में भी भारतीय पाठकों का प्रिंट किताबों से लगाव कम नहीं हुआ है। 2025 के आंकड़े बताते हैं कि भौतिक किताबों की लोकप्रियता ई-बुक्स से कहीं अधिक बनी हुई है। स्टेटिस्टा के अनुसार, भारत का प्रिंट बुक बाजार 2025 में 5.83 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जबकि ई-बुक बाजार केवल 255 मिलियन डॉलर का रहा। नील्सनआईक्यू बुकडेटा की रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में भारत ने 18 देशों में सबसे तेज 27% की राजस्व वृद्धि दर्ज की। इसमें फिक्शन की बिक्री में 30.7% की शानदार उछाल आई। क्रॉसवर्ड बुकस्टोर्स की निदेशक निधि गुप्ता बताती हैं, “हमारे स्टोर्स में 65-70% बिक्री प्रिंट किताबों की है। दिलचस्प बात यह है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पढ़ने वाले लोग भी वही किताब प्रिंट में खरीदते हैं।” मेट्रो शहरों में प्रिंट का हिस्सा 65-70% है, जबकि टियर-2 और टियर-3 शहरों में यह 85% तक पहुंचता है।
ई-बुक्स की पैठ अभी केवल 8.1%
एमबीएमसीपीडब्ल्यूबी के सर्वेक्षण में 62% पाठकों ने प्रिंट किताबों को प्राथमिकता दी। युवा पीढ़ी भले ही ई-बुक्स की सुविधा की सराहना करती है, लेकिन प्रिंट किताबों का स्पर्श, उन्हें संग्रहित करने का आनंद और बैटरी-मुक्त पढ़ने का अनुभव आज भी पाठकों को आकर्षित करता है। वर्तमान में ई-बुक्स की पैठ केवल 8.1% है, जो 2029 तक 9.6% तक पहुंचने का अनुमान है। कोविड महामारी के बाद पढ़ने की आदत में वृद्धि हुई, लेकिन प्रिंट ने डिजिटल को पीछे छोड़ दिया। बुकस्टोर्स अब लेखक मुलाकात, साहित्यिक कार्यक्रमों और पुस्तक विमोचन जैसी गतिविधियों के माध्यम से ग्राहकों को जोड़े रख रहे हैं। अमेजन किंडल जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म चुनौती जरूर हैं, लेकिन प्रिंट का सांस्कृतिक और भावनात्मक महत्व अभी भी कायम है।
भविष्य हाइब्रिड मॉडल का प्रतीत होता है, जहां प्रिंट और डिजिटल दोनों साथ-साथ चलेंगे। विशेषज्ञों के अनुसार, 2029 तक प्रिंट पाठकों की संख्या 501 मिलियन तक पहुंच जाएगी। पाठक अपनी सुविधा और मूड के अनुसार माध्यम का चयन करेंगे, लेकिन प्रिंट किताबों का आकर्षण बना रहेगा।
