नई दिल्ली।
केंद्र सरकार महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को समाप्त कर उसकी जगह एक नया कानून लाने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित विधेयक का नाम विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण), 2025 यानी VB–जी राम जी बिल रखा गया है। सरकार का दावा है कि इसके जरिए ग्रामीण रोजगार व्यवस्था को वर्ष 2047 तक के ‘विकसित भारत’ के राष्ट्रीय विजन से जोड़ा जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, नए कानून के तहत प्रत्येक ग्रामीण परिवार के उन वयस्क सदस्यों को, जो अकुशल शारीरिक श्रम करने के इच्छुक हों, हर वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के रोजगार की वैधानिक गारंटी देने का प्रस्ताव है। यह मौजूदा मनरेगा की 100 दिन की गारंटी से अधिक है। इसके साथ ही ग्रामीण विकास, आजीविका सशक्तिकरण और विभिन्न सरकारी योजनाओं के बेहतर समन्वय पर विशेष जोर दिया जाएगा, ताकि गांवों की अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सके।

फंडिंग पैटर्न में विवादास्पद बदलाव

हालांकि, इस विधेयक में सबसे बड़ा और विवादास्पद बदलाव फंडिंग पैटर्न को लेकर है। वर्तमान में मनरेगा के तहत मजदूरी की पूरी लागत केंद्र सरकार वहन करती है, जबकि सामग्री लागत का 75 प्रतिशत भी केंद्र के जिम्मे होता है। लेकिन VB–जी राम जी बिल में यह व्यवस्था बदलने का प्रस्ताव है। नए ढांचे के अनुसार, योजना की कुल लागत का 60 प्रतिशत केंद्र सरकार और 40 प्रतिशत राज्य सरकारें वहन करेंगी। इससे राज्यों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ने की आशंका जताई जा रही है। गौरतलब है कि मनरेगा की शुरुआत वर्ष 2005 में यूपीए सरकार ने की थी और 2009 में इसे महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम का नाम दिया गया। इस कानून के तहत ग्रामीण परिवारों को रोजगार का कानूनी अधिकार प्राप्त है।

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