राजस्थान में नशे के खिलाफ जंग, अब तक 4 हजार किलो ड्रग्स नष्ट 2029 तक भारत को नशा मुक्त बनाने का लक्ष्य, PIB जयपुर में हुई मीडिया वर्कशॉप
फ्राइडे संवाद. जयपुर। राजस्थान में नशे के खिलाफ चल रहे अभियान में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने अब तक करीब 4 हजार किलो ड्रग्स जब्त कर नष्ट की है। एनसीबी के आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में 2025 में मादक पदार्थों से जुड़े 6 हजार 387 मामले दर्ज हुए थे, वहीं जुलाई 2026 तक ही करीब 5 हजार मामले सामने आ चुके हैं। डार्क नेट और क्रिप्टो करेंसी के जरिए हो रही ड्रग्स की खरीद-बिक्री पर भी लगातार निगरानी रखी जा रही है। इसी क्रम में नशे के खिलाफ 100 सप्ताह के राष्ट्रव्यापी ‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान’ को राजस्थान के हर हिस्से तक पहुंचाने के लिए बुधवार को पीआईबी जयपुर की ओर से मीडिया वर्कशॉप आयोजित की गई, जिसमें एनसीबी, केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने नशे के बढ़ते खतरे और रोकथाम के उपायों की जानकारी साझा की।
2029 तक नशा मुक्त भारत का लक्ष्य
एनसीबी के जोनल डायरेक्टर अभिषेक नारायण सिन्हा ने बताया कि गृह मंत्रालय ने जून 2026 में ‘विजन डॉक्यूमेंट ऑन नारकोटिक्स कंट्रोल (2026-2029)’ जारी किया है, जिसके तहत खुफिया आधारित कार्रवाई, आधुनिक तकनीक और विभिन्न एजेंसियों के समन्वय से ड्रग नेटवर्क को खत्म करने पर फोकस रहेगा। इसका लक्ष्य 2029 तक भारत को नशा मुक्त बनाने की दिशा में आगे बढ़ना है। उन्होंने बताया कि राजस्थान में एनसीबी के जयपुर और जोधपुर में दो प्रमुख कार्यालय हैं और ड्रग्स से जुड़ी किसी भी जानकारी के लिए हेल्पलाइन नंबर 1933 पर संपर्क किया जा सकता है। साथ ही एनसीबी की विशेष अदालतों की संख्या भी 9 से बढ़ाकर 13 कर दी गई है।
स्कूल-कॉलेजों में जागरुकता, प्रतियोगिताओं से संदेश
केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो के डीके सोथी ने बताया कि सिंथेटिक ड्रग्स, प्रतिबंधित साइकोट्रोपिक दवाइयों और अवैध मेडिकल इंजेक्शनों के नेटवर्क पर भी कार्रवाई की जा रही है। ‘ऑपरेशन युवा रक्षा’ के तहत स्कूल, कॉलेज और कोचिंग सेंटरों के आसपास नुक्कड़ नाटक और जागरुकता रैलियां आयोजित की जा रही हैं। माय भारत के सहायक निदेशक प्रदीप कुमार ने बताया कि राजस्थान के सभी जिलों में कविता, भाषण और लोक नृत्य के जरिए युवाओं को नशे से दूर रहने के लिए जागरूक किया गया है। उन्होंने बताया कि जल्द ही राज्यस्तरीय कार्यक्रम होंगे और विजेताओं को राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए दिल्ली भेजा जाएगा।
मीडिया से सकारात्मक कहानियां सामने लाने की अपील
पीआईबी जयपुर के निदेशक अनुभव बैरवा ने कहा कि युवा देश की सबसे बड़ी ताकत हैं, लेकिन नशे की लत इस ताकत को कमजोर करती है। उन्होंने मीडिया से नशा मुक्ति से जुड़ी गतिविधियों, सफल पुनर्वास की कहानियों, विशेषज्ञों की सलाह और युवाओं की सकारात्मक उपलब्धियों को प्रमुखता से सामने लाने की अपील की। वहीं CGHS जयपुर की डॉ. रेणु खंडेलवाल ने कहा कि नशे की लत को सिर्फ आदत नहीं, बल्कि एक जटिल बीमारी के रूप में समझना चाहिए, जिसके पीछे सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और जेनेटिक कारण हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि नशा मुक्ति के लिए डिटॉक्सीफिकेशन के साथ मनोवैज्ञानिक और पारिवारिक सहयोग भी उतना ही जरूरी है।