शेखावाटी क्षेत्र में अल्पसंख्यक शिक्षा व्यवस्था बदहाल, डीएचपी फाउंडेशन ने जताई चिंता
फ्राइडे संवाद. दुबई | डीएचपी फाउंडेशन की ओर से 08 अगस्त को जारी एक विज्ञप्ति में शेखावाटी क्षेत्र के अल्पसंख्यक स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर चिंता जताई गई है। फाउंडेशन के अंतरराष्ट्रीय कार्यालय, दुबई से जारी बयान में वॉइस ऑफ शेखावाटी ग्रुप में सज्जाद हैदर द्वारा क्षेत्र के अल्पसंख्यक स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था की समीक्षा किए जाने की सराहना की। बयान में कहा गया है कि व्यापारियान समाज की कमजोर शिक्षा व्यवस्था पर अब तक गंभीरता से विचार नहीं किया गया, जिसके चलते इन स्कूलों में औसत से कमतर शिक्षा दी जा रही है। किसी भी समाज की सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक और वैचारिक तरक्की का आधार उत्तम शिक्षा व्यवस्था ही होती है, जिसमें यह समाज काफी पीछे है। पिछली एक सदी में व्यापारियान से राष्ट्रीय या राज्य स्तर का कोई बड़ा नेता, खिलाड़ी, वैज्ञानिक या बड़ा उद्योगपति सामने नहीं आ सका, जिसका सीधा संबंध शिक्षा की गुणवत्ता से जोड़ा गया है।
बयान में अमेरिकी इतिहासकार व अर्थशास्त्री जेफ्री सैक्स की पुस्तक “द प्राइस ऑफ सिविलाइजेशन” का हवाला देते हुए कहा गया कि शिक्षा व्यवस्था की श्रेष्ठता ही किसी देश की भविष्य की आर्थिक व सामरिक शक्ति तय करती है।
डीएचपी फाउंडेशन के दाऊद हनीफ़ पीनारा ने व्यापारी समाज से अपील की है कि वे अपने बच्चों की स्कूली शिक्षा पर समुचित खर्च करें, ताकि आने वाली पीढ़ी राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सके। विशेषज्ञों के अनुमान के अनुसार इस सदी के अंत तक विश्व की जीडीपी चार से पांच गुना बढ़ने की संभावना है, और इसका लाभ केवल रचनात्मक व नवाचारी शिक्षा से लैस लोगों को ही मिल पाएगा।