नई दिल्ली।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के बढ़ते उपयोग को लेकर एक नई चिंता सामने आई है। हालिया शोध में दावा किया गया है कि एआई पर अत्यधिक निर्भरता से इंसानों की बौद्धिक क्षमता, विशेषकर सोचने-समझने और समस्या-समाधान की क्षमता, धीरे-धीरे कमजोर हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक जहां सुविधा दे रही है, वहीं इसका अति प्रयोग मानसिक सक्रियता को प्रभावित कर रहा है। शोध के अनुसार, एआई आधारित टूल्स के नियमित इस्तेमाल से मस्तिष्क के उन हिस्सों की सक्रियता कम हो रही है, जो विश्लेषण, तर्क और रचनात्मक सोच से जुड़े होते हैं। अध्ययन में शामिल शोधकर्ताओं ने पाया कि एआई की मदद से काम करने वाले लोग धीरे-धीरे खुद सोचने की बजाय तैयार उत्तरों पर निर्भर होने लगते हैं। इससे उनकी निर्णय लेने की क्षमता और मौलिक विचार शक्ति प्रभावित होती है।
मस्तिष्क की सक्रियता अपेक्षाकृत कम पाई गई
अध्ययन में 18 से 39 वर्ष आयु वर्ग के प्रतिभागियों को शामिल किया गया। इन्हें तीन समूहों में बांटा गया। पहले समूह ने एआई टूल्स की मदद से कार्य किया, दूसरे ने केवल सर्च इंजन का उपयोग किया, जबकि तीसरे समूह ने बिना किसी डिजिटल सहायता के कार्य पूरे किए। परिणामों में सामने आया कि एआई पर निर्भर समूह में मस्तिष्क की सक्रियता अपेक्षाकृत कम पाई गई, जबकि बिना सहायता काम करने वाले प्रतिभागियों की सोचने-समझने की क्षमता अधिक मजबूत रही।
एआई का उपयोग पूरी तरह नकारात्मक नहीं
शोधकर्ताओं का कहना है कि एआई का उपयोग पूरी तरह नकारात्मक नहीं है, लेकिन इसकी अंधाधुंध निर्भरता खतरनाक हो सकती है। खासकर शिक्षा और शोध के क्षेत्र में यदि छात्र केवल एआई से तैयार सामग्री पर भरोसा करेंगे, तो उनकी सीखने की प्रक्रिया प्रभावित होगी। अध्ययन में यह भी सामने आया कि एआई की मदद लेने वाले कई प्रतिभागी बाद में स्वयं लिखे या सीखे गए तथ्यों को ठीक से याद नहीं रख पाए। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि एआई को सहायक उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया
