सड़कें बुहारने वाला बालक बना मंत्री, डीके शिवकुमार कैबिनेट में शामिल हुए के एस बसवंतप्पा
मां-बाप थे सफाई कर्मचारी, कोविड काल में सेवा से मिला ‘एंबुलेंस बसवंतप्पा’ का नाम
बंगलुरु | कर्नाटक के दावणगेरे शहर में जन्मे के एस बसवंतप्पा बचपन में सड़कें बुहारा करते थे। सोमवार को वे डीके शिवकुमार कैबिनेट में मंत्री पद की शपथ ले चुके हैं। अत्यंत पिछड़ी अनुसूचित जाति की मादिगा समुदाय से आने वाले बसवंतप्पा की इस उपलब्धि का श्रेय उनके मिलनसार और सहयोगी स्वभाव को दिया जाता है। 57 वर्षीय बसवंतप्पा के माता-पिता दोनों पौरकर्मिक (नगरपालिका सफाई कर्मचारी) थे। दो साल पहले विधानसभा में सफाई कर्मचारियों पर हुई चर्चा के दौरान उन्होंने बताया था कि उनकी मां हनुमक्का और पिता संगप्पा दोनों पौरकर्मिक थे और वे दावणगेरे के आजाद नगर में मां के साथ सड़कें बुहारा करते थे।
टिकट चेकर से लेकर शव गृह तक की नौकरी
दावणगेरे के मायाकोंडा से पहली बार विधायक बने बसवंतप्पा को कई तरह के संघर्ष झेलने पड़े। माता-पिता के बीमार होने पर उनकी जगह काम करने के अलावा वे दावणगेरे के गीतांजलि, पुष्पांजलि और पद्मांजलि थियेटरों में टिकट चेकर भी रहे। इसके बाद उन्होंने दावणगेरे के सरकारी अस्पताल के शव गृह में भी काम किया और बाद में केएसआरटीसी बस स्टैंड, सरकारी कार्यालयों व अस्पतालों में शौचालय सफाई के ठेके लेना शुरू किया।
पूर्व मंत्री अंजनेय से मिली राजनीतिक राह
बसवंतप्पा की राजनीतिक यात्रा में पूर्व मंत्री एच अंजनेय का बड़ा योगदान रहा, जो उनके रिश्तेदार भी हैं। वर्षों तक अंजनेय के लिए प्रचार करते-करते वे 2016 में दावणगेरे जिले के हनगोड़ु से जिला पंचायत सदस्य चुने गए। कोविड महामारी के दौरान जिला अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों की मदद करने से उन्हें ‘एंबुलेंस बसवंतप्पा’ का नाम मिला, जिसने उन्हें जनता में खासा लोकप्रिय बना दिया। इसी लोकप्रियता के चलते 2023 विधानसभा चुनाव में उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी से लगभग दोगुने वोटों से जीत दर्ज की, जबकि 2018 में वे 6,458 वोटों से हार गए थे।