Skip to content
-
Subscribe to our newsletter & never miss our best posts. Subscribe Now!
  • https://www.facebook.com/
  • https://twitter.com/
  • https://t.me/
  • https://www.instagram.com/
  • https://youtube.com/
Friday Sanwad Friday Sanwad

दुनिया और आख़िरत की कामयाबी के लिए पढ़ते रहना जरूरी है।

Friday Sanwad Friday Sanwad

दुनिया और आख़िरत की कामयाबी के लिए पढ़ते रहना जरूरी है।

  • टॉप न्यूज़
  • देश
  • टेक – ऑटो
  • विदेश
  • जयपुर
  • राजस्थान
  • स्पोर्ट्स
  • Privacy Policy
  • Contact Us
  • टॉप न्यूज़
  • देश
  • टेक – ऑटो
  • विदेश
  • जयपुर
  • राजस्थान
  • स्पोर्ट्स
  • Privacy Policy
  • Contact Us
Close

Search

देश

सिविल सेवाओं में प्रतिनिधित्व की कमी चिंताजनक: मौलाना मुजद्दिदी

By Friday Sanwad
January 9, 2026 1 Min Read
0

नई दिल्ली। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (ए.आई.एम.पी.एल.बी.) के महासचिव मौलाना फजलुर रहीम मुजद्दिदी ने सिविल सेवाओं और न्यायपालिका में अल्पसंख्यक समुदायों, विशेषकर मुसलमानों के कम प्रतिनिधित्व पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर समुदाय को जनसंख्या के अनुपात में भागीदारी मिलनी चाहिए।

आंकड़े बयां करते हैं असंतुलन

मौलाना मुजद्दिदी ने बताया कि देश में मुसलमानों की आबादी 18-20 प्रतिशत होने के बावजूद सिविल सेवाओं में उनकी हिस्सेदारी मात्र 2-3 प्रतिशत है। सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में यह आंकड़ा 1 प्रतिशत से भी कम है। इसके विपरीत, अन्य समुदायों का प्रतिनिधित्व उनकी जनसंख्या से कहीं अधिक है।

नीतियों पर सीधा असर

उन्होंने कहा कि शिक्षा, रक्षा, वित्त और विदेश नीति जैसे महत्वपूर्ण फैसले उन्हीं लोगों द्वारा लिए जाते हैं जो इन संस्थानों में मौजूद होते हैं। यदि किसी समुदाय का प्रतिनिधि निर्णय की “टेबल” पर नहीं है, तो वह अपने हितों की प्रभावी रक्षा नहीं कर सकता।

युवाओं से अपील

मौलाना मुजद्दिदी ने स्वीकार किया कि बीते 60-70 वर्षों में मुसलमानों ने सिविल सेवाओं को पर्याप्त प्राथमिकता नहीं दी, जिसका खामियाजा आज भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि सिविल सेवाओं को केवल सरकारी नौकरी न समझें, बल्कि इसे देश सेवा और समाज सेवा का माध्यम मानें। उन्होंने कहा, “ईमानदारी और निष्ठा के साथ यदि सिविल सेवाओं में प्रवेश किया जाए, तो न केवल देश का भला होगा, बल्कि समुदाय के हितों की भी बेहतर रक्षा हो सकेगी।”

Author

Friday Sanwad

Follow Me
Other Articles
Previous

बिहार का सत्याप कुमार: 13 में आईआईटी क्रैक, 24 में पीएचडी और अमेरिका में करियर की नई ऊँचाइयाँ

Next

अलीबाबा का एआई दांव: भारी निवेश से बदल रहा ई-कॉमर्स का भविष्य

No Comment! Be the first one.

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Memories News

Hot Blogs

Copyright 2026 — Friday Sanwad. All rights reserved. frnews.org