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दीन- दुनिया

20 पेंस की ईमानदारी: जब एक इमाम ने बचा ली इस्लाम की छवि

By Friday Sanwad
November 7, 2025 2 Min Read
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एफआर न्यूज. लंदन | लंदन में घटी एक घटना ने यह साबित कर दिया कि व्यक्तिगत आचरण किस तरह पूरे धर्म और समुदाय की छवि को प्रभावित कर सकता है। यह कहानी एक इमाम की ईमानदारी और उनके नैतिक मूल्यों की है, जिसने एक गैर-मुस्लिम व्यक्ति को इस्लाम के बारे में सोचने पर मजबूर कर दिया। लंदन के एक इमाम साहब रोजाना घर से मस्जिद जाने के लिए बस से यात्रा करते थे। नियमित समय और एक ही रूट पर यात्रा करने के कारण अक्सर उन्हें वही बस और वही ड्राइवर मिलता था। एक दिन जब वे बस में सवार हुए और कंडक्टर को किराया दिया, तो बाकी पैसे वापस लेकर सीट पर बैठ गए।

थोड़े से पैसों से क्या फर्क पड़ेगा?

पैसे गिनते समय इमाम साहब ने पाया कि कंडक्टर ने गलती से 20 पेंस ज्यादा दे दिए हैं। पहले उन्होंने सोचा कि उतरते समय ये पैसे वापस कर देंगे, क्योंकि यह उनका हक नहीं है। फिर एक विचार आया कि इतने कम पैसों की कौन परवाह करता है? ट्रांसपोर्ट कंपनी तो लाखों पाउंड कमाती है, इन थोड़े से पैसों से क्या फर्क पड़ेगा? इसी कशमकश में उनका स्टॉप आ गया। अंततः, उन्होंने बस से उतरने से पहले ईमानदारी का रास्ता चुना और कंडक्टर को वो 20 पेंस वापस कर दिए, कहते हुए, “लगता है आपने गलती से मुझे ज्यादा दे दिए।”

परीक्षा का खुलासा

कंडक्टर ने मुस्कुराते हुए पूछा, “क्या आप इस इलाके की मस्जिद के इमाम हैं?” उन्होंने हां में जवाब दिया। कंडक्टर ने कहा, “मैं बहुत समय से आपकी मस्जिद में जाकर इस्लाम के बारे में जानना चाह रहा था। ये 20 पेंस मैंने जानबूझकर ज्यादा दिए थे ताकि इस मामूली रकम के बारे में आपका रवैया परख सकूं और इस्लाम को समझ सकूं।”
बस से उतरते ही इमाम साहब की टांगें कांपने लगीं। उन्होंने बिजली के खंभे का सहारा लिया और आसमान की ओर देखते हुए रोते हुए दुआ की, “या अल्लाह, मुझे माफ कर देना। मैं अभी इस्लाम को बीस पेंस में बदनाम करने जा रहा था।”

संदेश

यह घटना इस बात का प्रमाण है कि कभी-कभी लोग केवल कुरआन पढ़कर नहीं, बल्कि मुसलमानों के व्यवहार को देखकर इस्लाम का आकलन करते हैं। हमारा व्यक्तिगत आचरण पूरे समुदाय की छवि बना सकता है। इसलिए सावधान रहना जरूरी है, क्योंकि सफेद कपड़े पर लगा दाग दूर से नजर आ जाता है। अगर हम किसी को मुसलमान नहीं बना सकते, तो कम से कम अपनी किसी हरकत से उसे इस्लाम से विमुख भी न करें।

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Friday Sanwad

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