2030 तक 2.1 करोड़ हो सकते हैं गिग वर्कर्स, महिलाओं की भागीदारी अब भी बेहद कम
भारत में गिग और इंटरनेट आधारित रोजगार तेजी से बढ़ रहा है। विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के विस्तार के साथ आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में रोजगार के बड़े अवसर बनने की उम्मीद है। रेडसीर स्ट्रैटेजी की एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2030 तक देश में गिग इंटरनेट कामगारों की संख्या बढ़कर 1.7 करोड़ से 2.1 करोड़ के बीच पहुंच सकती है। हालांकि, इस तेज़ी से बढ़ते रोजगार बाजार में महिलाओं की भागीदारी अब भी बेहद सीमित बनी हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2020 में गिग सेक्टर में महिलाओं की हिस्सेदारी केवल 0.5 प्रतिशत थी, जो 2025 तक बढ़कर करीब एक प्रतिशत हो गई है। इसके मुकाबले भारत में कुल महिला श्रम भागीदारी दर लगभग 28 प्रतिशत है। महिलाओं की सबसे अधिक मौजूदगी ब्यूटी और वेलनेस सेवाओं में देखने को मिलती है, जहां उनकी हिस्सेदारी 35 से 45 प्रतिशत के बीच है। वहीं, फूड डिलीवरी जैसे क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी एक प्रतिशत से भी कम है।
फुल-टाइम गिग वर्कर्स की कमाई सामान्य कर्मचारियों की तुलना में करीब 2.5 गुना अधिक
- वर्तमान में देश में लगभग 60 लाख मासिक सक्रिय गिग वर्कर्स कार्यरत हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस दशक के अंत तक रोजगार के क्षेत्र में गिग सेक्टर की भूमिका और अधिक मजबूत होगी तथा कुल नई नौकरियों का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आएगा। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2030 तक रोजगार सृजन में गिग सेक्टर का योगदान करीब 70 प्रतिशत तक हो सकता है। आय के मामले में भी गिग सेक्टर कई पारंपरिक नौकरियों की तुलना में बेहतर अवसर प्रदान कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, फुल-टाइम गिग वर्कर्स की कमाई सामान्य कर्मचारियों की तुलना में करीब 2.5 गुना अधिक है। गिग वर्कर्स की औसत प्रति घंटा कमाई 138 रुपये दर्ज की गई, जबकि अन्य कर्मचारियों की औसत प्रति घंटा आय 54 रुपये रही। मासिक आय के लिहाज से घरेलू सेवाएं (होम सर्विसेज) सबसे आगे हैं। इस क्षेत्र में पूर्णकालिक काम करने वाले कर्मियों की शुद्ध मासिक आय 80 हजार रुपये तक पहुंची। वहीं, ड्राइवरों की औसत मासिक आय लगभग 39 हजार रुपये रही, जबकि डिलीवरी वर्कर्स की आय 22 हजार से 23 हजार रुपये के बीच दर्ज की गई। डिलीवरी सेक्टर में 50 से 70 लाख और होम सर्विसेज में 2 से 3 लाख कामगारों के जुड़ने की संभावना रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि 54 प्रतिशत लोग गिग प्लेटफॉर्म से जुड़ने से पहले किसी भी प्रकार के रोजगार में नहीं थे। इससे स्पष्ट होता है कि यह क्षेत्र पहली बार नौकरी करने वाले युवाओं और बेरोजगारों के लिए रोजगार का महत्वपूर्ण माध्यम बनकर उभरा है। भविष्य के अनुमान के अनुसार, वर्ष 2030 तक ऐप आधारित कैब सेवा (राइड-हेलिंग) में 1.2 से 1.4 करोड़ गिग वर्कर्स कार्यरत हो सकते हैं। वहीं, डिलीवरी सेक्टर में 50 से 70 लाख और होम सर्विसेज में 2 से 3 लाख कामगारों के जुड़ने की संभावना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने, सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने, कौशल विकास और सुरक्षित कार्य वातावरण उपलब्ध कराने पर ध्यान दिया जाए, तो गिग अर्थव्यवस्था देश के रोजगार बाजार में और अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। यह क्षेत्र न केवल युवाओं को रोजगार दे रहा है, बल्कि भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को भी नई गति प्रदान कर रहा है।