89% भारतीय कंपनियां अब कर रहीं केवल स्किल-आधारित हायरिंग
नई दिल्ली। नौकरी पाने का तरीका तेजी से बदल रहा है। अब केवल डिग्री, कॉलेज का नाम या अच्छे अंक ही नौकरी की गारंटी नहीं रहे। कंपनियां ऐसे उम्मीदवारों को प्राथमिकता दे रही हैं जिनके पास उद्योग की जरूरतों के अनुरूप व्यावहारिक कौशल हो और इसका प्रमाण देने वाले सर्टिफिकेट यानी माइक्रो-क्रेडेंशियल्स हों। कोर्सेरा की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में अब 89 प्रतिशत नियोक्ता एंट्री-लेवल भर्ती के लिए बड़े पैमाने पर स्किल-आधारित भर्ती मॉडल अपना रहे हैं, जो वैश्विक औसत 82 प्रतिशत से भी अधिक है।
रिपोर्ट के अनुसार 97 प्रतिशत नियोक्ताओं का कहना है कि ऐसे कर्मचारियों का पहले साल का प्रदर्शन बेहतर रहा, जिनके पास अपना स्किल साबित करने वाले सर्टिफिकेट थे। 81 प्रतिशत कंपनियों ने कहा कि वे ऐसे उम्मीदवारों को भर्ती प्रक्रिया में अन्य उम्मीदवारों की तुलना में तेजी से आगे बढ़ाते हैं। अपना स्किल साबित करने वाला सर्टिफिकेट हासिल करने वाले 91 प्रतिशत युवाओं को 12 महीनों के भीतर उनके अध्ययन क्षेत्र से जुड़ी नौकरी मिल गई। यह रिपोर्ट बताती है कि रोजगार बाजार ‘डिग्री से ज्यादा स्किल’ वाले मॉडल की ओर बढ़ चुका है। इसके अलावा 94 प्रतिशत नियोक्ता माइक्रो-क्रेडेंशियल्स वाले उम्मीदवारों को अधिक शुरुआती वेतन देने के लिए भी तैयार हैं, और 87 प्रतिशत माइक्रो-क्रेडेंशियल्स प्राप्त स्नातकों को एक वर्ष के भीतर पसंदीदा क्षेत्र में नौकरी मिल जाती है।
कंपनियां चाहती हैं कि नए कर्मचारी नौकरी ज्वाइन करते ही काम संभाल सकें, इसलिए सत्यापित और उद्योग की जरूरतों के अनुरूप तैयार माइक्रो-क्रेडेंशियल्स की मांग तेजी से बढ़ रही है। 95 प्रतिशत भारतीय नियोक्ता उद्योग जगत की साझेदारी से तैयार सर्टिफिकेट कोर्स पर अधिक भरोसा करते हैं। भारत में ऑनलाइन सीखने वाले छात्रों के बीच गूगल और आईबीएम के प्रोफेशनल सर्टिफिकेट सबसे लोकप्रिय हैं, जिनमें गूगल डेटा एनालिटिक्स, गूगल एआई, गूगल आईटी ऑटोमेशन विद पाइथन, डिजिटल मार्केटिंग एंड ई-कॉमर्स तथा आईबीएम डेटा साइंस शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार भारतीय छात्र औपचारिक शैक्षणिक क्रेडिट वाले माइक्रो-क्रेडेंशियल्स को अधिक तरजीह दे रहे हैं—73 प्रतिशत छात्रों ने कहा कि वे क्रेडिट वाले सर्टिफिकेट कोर्स करना पसंद करेंगे, जबकि केवल 21 प्रतिशत ने बिना क्रेडिट वाले कार्यक्रमों में रुचि दिखाई। वहीं 71 प्रतिशत उच्च शिक्षा संस्थानों के प्रमुखों का मानना है कि देश में बाहरी क्रेडिट मान्यता व्यवस्था को और मजबूत बनाने की जरूरत है, ताकि ऐसे कोर्स विश्वविद्यालयों में आसानी से शामिल किए जा सकें।