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अखलाक लिंचिंग केस: यूपी सरकार का आरोपियों के खिलाफ केस वापस लेने का फैसला, उठे सवाल

By Friday Sanwad
November 20, 2025 2 Min Read
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लखनऊ/दादरी। उत्तर प्रदेश सरकार ने 2015 में हुए दादरी लिंचिंग मामले में सभी आरोपियों के खिलाफ केस वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह फैसला न्याय व्यवस्था और सामाजिक सद्भाव के लिए गंभीर सवाल खड़े करता है। 28 सितंबर 2015 की रात ग्रेटर नोएडा के बिसाड़ा गांव में 52 वर्षीय मोहम्मद अखलाक को गौ तस्करी रखने के आरोप में भीड़ ने बेरहमी से पीटा। इस हमले में अखलाक की मौत हो गई और उनका बेटा दानिश गंभीर रूप से घायल हुआ। प्रारंभिक जांच में 19 आरोपियों का नाम सामने आया था, जिनमें से 15 के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी।

कानूनी प्रक्रिया

सरकारी वकील ने पुष्टि की है कि केस वापसी के लिए औपचारिक पत्र प्राप्त हुआ है। यह अर्जी सूरजपुर कोर्ट में दाखिल की गई है और 12 दिसंबर को इस पर सुनवाई होनी है। पीड़ित परिवार के वकील यूसुफ सैफी ने कहा कि दस्तावेज मिलने के बाद ही वे कोई टिप्पणी कर पाएंगे। राजनीतिक विश्लेषकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस फैसले पर गहरी चिंता जताई है। उनका मानना है कि मॉब लिंचिंग जैसे गंभीर अपराध में आरोपियों को छूट देना न केवल न्याय व्यवस्था को कमजोर करेगा, बल्कि समाज में हिंसा और असहिष्णुता को भी बढ़ावा देगा। यह संविधान में निहित समानता और न्याय के मूल सिद्धांतों के विरुद्ध भी माना जा रहा है।

एसटी हसन ने क्या कहा?

इस पूरे मामले में सपा के पूर्व सांसद एसटी हसन ने कहा कि 2015 में एक बेकसूर की लिंचिंग कर दी गई थी। उसका कसूर सिर्फ इतना था कि उसके फ्रिज मं बकरे का मांस मिला था। हसन ने कहा कि उन्हें लगता है कि अखलाक की हत्या करने के लिए कुछ लोग वहां मौजूद थे जिन्होंने बेरहमी से उसकी हत्या की थी। उनके खिलाफ कार्रवाई जरूर होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारी न्यायपालिका अभी उस स्तर पर नहीं पहुंची है कि वह ऐसे मामलों में मुकदमे वापस लेने की अनुमति दे। उन्होंने कहा ऐसा होना भी नहीं चाहिए।

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