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एसआईआर फेज-2: 12 राज्यों-यूटी की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 6.5 करोड़ नाम हटाए गए

By Friday Sanwad
January 9, 2026 2 Min Read
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नई दिल्ली
चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) प्रक्रिया के दूसरे चरण में बड़ा बदलाव सामने आया है। 9 राज्यों और 3 केंद्रशासित प्रदेशों की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से करीब 6.5 करोड़ मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। यह कदम वोटर लिस्ट को सटीक और विश्वसनीय बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

किन राज्यों में हुई कटौती

नाम हटाने की यह प्रक्रिया अंडमान निकोबार द्वीपसमूह, लक्षद्वीप, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, मध्य प्रदेश, पुडुचेरी, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में हुई है। एसआईआर के इस चरण से पहले इन 12 जगहों पर कुल 50.90 करोड़ वोटर पंजीकृत थे, जो अब घटकर 44.40 करोड़ रह गए हैं। चुनाव आयोग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि हटाए गए नामों को ‘एएसडी’ कैटेगरी में रखा गया है, यानी ये अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लिकेट एंट्री हैं।

यूपी में सबसे अधिक कटौती

उत्तर प्रदेश में सबसे बड़ी कटौती देखी गई। मंगलवार को जारी ड्राफ्ट लिस्ट में पहले के 15.44 करोड़ वोटरों में से 2.89 करोड़ नाम हटा दिए गए। अब लिस्ट में केवल 12.55 करोड़ नाम शेष हैं, जो करीब 18.70 प्रतिशत की कटौती है। यूपी के मुख्य चुनाव अधिकारी नवदीप रिनवा ने बताया कि ये नाम मृत्यु, स्थायी स्थानांतरण या डुप्लिकेट एंट्री के कारण हटाए गए हैं।

एसआईआर प्रक्रिया का इतिहास

एसआईआर का पहला चरण बिहार विधानसभा चुनाव से पहले शुरू हुआ था। दूसरा चरण 27 अक्टूबर 2024 से 12 राज्यों में शुरू हुआ। आखिरी बार अधिकांश राज्यों में यह प्रक्रिया 2002-2004 के बीच हुई थी। सरकार का मुख्य फोकस अवैध विदेशी प्रवासियों, खासकर बांग्लादेश और म्यांमार से आए लोगों को वोटर लिस्ट से हटाना है।

आपत्ति दर्ज करने का मौका

ड्राफ्ट लिस्ट जारी होने के बाद नागरिक दावे और आपत्तियां दर्ज कर सकते हैं। उत्तर प्रदेश में यह प्रक्रिया 6 फरवरी तक खुली है। जिनके नाम गलती से हट गए हैं, वे सबूत देकर नाम वापस जुड़वा सकते हैं।

विपक्ष का विरोध

कांग्रेस, टीएमसी, समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों ने इस प्रक्रिया का कड़ा विरोध किया है। उनका आरोप है कि लाखों वैध मतदाताओं के नाम बिना उचित जांच के हटाए जा रहे हैं। विपक्ष का दावा है कि विशेष रूप से मुस्लिम बहुल क्षेत्रों, प्रवासियों और कमजोर वर्गों को निशाना बनाया जा रहा है। पश्चिम बंगाल की टीएमसी ने इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। विपक्ष इसे बीजेपी की चुनावी रणनीति बता रहा है।
चुनाव आयोग का कहना है कि यह निष्पक्ष प्रक्रिया है और किसी को निशाना नहीं बनाया जा रहा। अब सभी की नजर अंतिम वोटर लिस्ट पर है।

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