जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट यात्रियों को बेहतर और सुविधाजनक सेवाएं देने की दिशा में लगातार नए कदम उठा रहा है। डिजिटल-फर्स्ट विज़न के तहत विकसित यह एयरपोर्ट 776 एकड़ में फैला हुआ है और अत्याधुनिक तकनीक व परिचालन उत्कृष्टता के लिए देशभर में जाना जाता है। बढ़ते यात्री दबाव और पीक आवर्स में भीड़ की समस्या को देखते हुए अब यहां AI-आधारित एयरपोर्ट क्यू मैनेजमेंट सिस्टम (एक्यूएमएस) लागू किया गया है, जो यात्रियों को भीड़-मुक्त और स्मार्ट यात्रा अनुभव देने में अहम भूमिका निभा रहा है। एक्यूएमएस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित एनालिटिक्स के जरिए एयरपोर्ट के अलग-अलग हिस्सों में यात्रियों की संख्या और उनकी आवाजाही पर लगातार नजर रखता है। टर्मिनल के एंट्री एरिया, चेक-इन काउंटर, सिक्योरिटी चेक और बोर्डिंग गेट जैसे प्रमुख जोनों में यह सिस्टम रियल-टाइम डेटा उपलब्ध कराता है। इससे यह तुरंत पता चल जाता है कि किस स्थान पर भीड़ बढ़ रही है और वहां समय रहते अतिरिक्त स्टाफ व संसाधन तैनात किए जा सकते हैं।
एयरपोर्ट प्रबंधन के अनुसार, यह सिस्टम खासतौर पर पीक आवर्स के दौरान बेहद प्रभावी साबित हो रहा है। वेटिंग टाइम का आकलन कर उसे कम करने में मदद मिलती है, जिससे यात्रियों को सुरक्षा जांच से लेकर बोर्डिंग तक कम समय लगता है। AI तकनीक के कारण यात्रियों की परेशानियों की पहचान तुरंत हो जाती है और उनका समाधान भी तेजी से किया जा रहा है। पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी जयपुर एयरपोर्ट ने अपनी अलग पहचान बनाई है। इसे ज़ीरो वेस्ट टू लैंडफिल (जेडडब्ल्यूएल) के लिए सराहना मिल चुकी है और मई 2025 में एयरपोर्ट्स काउंसिल इंटरनेशनल (एसीआई) से लेवल-3 मान्यता भी प्राप्त हुई है। यह उपलब्धियां एयरपोर्ट की सतत विकास नीति को दर्शाती हैं। अडानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स लिमिटेड द्वारा प्रबंधित जयपुर एयरपोर्ट अब एक्यूएमएस जैसे स्मार्ट सिस्टम के माध्यम से यात्रियों को अधिक सुरक्षित, सहज और आधुनिक यात्रा अनुभव देने की दिशा में एक और बड़ा कदम आगे बढ़ा चुका है।
