जयपुर। एक मजहबी बयान में वक्ता ने गुस्से पर काबू पाने और रब की नाराजगी से बचने के चार अहम उपाय बताए। उन्होंने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में इंसान छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा हो जाता है, जबकि इस्लामी तालीम सब्र और नेक अमल की राह दिखाती है। इन तरीकों को अपनाकर न सिर्फ दिल को सुकून मिलता है, बल्कि रब की रहमत भी हासिल होती है।

पहला तरीका: लगातार दुआ करना

वक्ता ने पहला तरीका दुआ बताया। उनके मुताबिक इंसान को हर हाल में रब से मांगते रहना चाहिए। हदीस का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि जो रब से नहीं मांगता, रब उससे नाराज हो जाते हैं। यहां तक कि अगर जूते का तस्मा टूट जाए तो भी रब से दुआ करनी चाहिए। रिजक हलाल, पाक और भरपूर मांगना चाहिए। दुआ बंदे और रब के दरमियान सीधा रिश्ता कायम करती है।

दूसरा तरीका: अच्छे अखलाक और अदब

दूसरा तरीका अच्छे अखलाक और अदब को अपनाना है। सूफी बुजुर्ग सुफयान सौरी के कौल का जिक्र करते हुए बताया गया कि जो शख्स अदब सीख लेता है, उस पर रब का गुस्सा ठंडा हो जाता है। वक्ता ने बेवजह गुस्से से बचने और नर्म मिजाज अपनाने की हिदायत दी। अदब सिर्फ तहजीब नहीं, बल्कि जीने का सलीका है।

तीसरा तरीका: सदका (खैरात)

तीसरा तरीका सदका यानी खैरात करना बताया गया। सहीह हदीसों के मुताबिक सदका रब के गुस्से को ठंडा कर देता है। खासतौर पर छुपके से दी गई खैरात ज्यादा असर रखती है। सदके से न सिर्फ मोहताजों की मदद होती है, बल्कि देने वाले के दिल में भी नर्मी आती है।

चौथा तरीका: सिला-ए-रहमी (रिश्तेदारों से अच्छे ताल्लुकात)

चौथा उपाय रिश्तेदारों से अच्छे ताल्लुकात रखना है। सिला-ए-रहमी से उम्र में बरकत आती है और रब की रहमत नाजिल होती है। खानदानी रिश्तों को मजबूत रखना इस्लाम में बेहद अहम माना गया है। आखिर में वक्ता ने दुआ की कि रब सबको अपनी रहमत के साए में रखे और गुस्से से महफूज फरमाए।

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