जयपुर। परीक्षा के मौसम में बढ़ते मानसिक दबाव और तनाव से विद्यार्थियों को राहत दिलाने के लिए राजस्थान शिक्षा विभाग ने मनोदर्पण कार्यक्रम के तहत व्यापक जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। शिक्षा निदेशक सीताराम जाट ने सभी संयुक्त निदेशकों को जारी आदेशों में कहा है कि विद्यालय स्तर पर विद्यार्थियों और अभिभावकों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील बनाया जाए। दरअसल, परीक्षा के दौरान कई छात्र विषय की अच्छी तैयारी के बावजूद तनाव और घबराहट के कारण उत्तर सही ढंग से प्रस्तुत नहीं कर पाते, जिससे अपेक्षित अंक नहीं मिलते। इसका परिणाम निराशा, आत्मविश्वास की कमी और गंभीर मानसिक दबाव के रूप में सामने आता है। इन्हीं समस्याओं को देखते हुए शिक्षा विभाग ने यह कदम उठाया है।
सेमिनार और काउंसलिंग सत्र होंगे आयोजित
मनोदर्पण कार्यक्रम के अंतर्गत स्कूलों में सेमिनार, काउंसलिंग सत्र और संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि विद्यार्थी खुलकर अपनी समस्याएं साझा कर सकें। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्रों को मानसिक रूप से मजबूत बनाना, उनकी भावनात्मक समस्याओं को समझना और उन्हें सही मार्गदर्शन उपलब्ध कराना है।
टोल-फ्री नंबर पर मिलेगी निःशुल्क काउंसलिंग
मनोदर्पण योजना के तहत राष्ट्रीय टोल-फ्री नंबर 844-844-0632 पर प्रतिदिन सुबह 8 बजे से शाम 8 बजे तक सप्ताह के सातों दिन निःशुल्क टेली-काउंसलिंग सेवा उपलब्ध है। इस पर प्रशिक्षित विशेषज्ञ विद्यार्थियों और अभिभावकों को मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा परामर्श देते हैं। इसके अलावा पीएम ई-विद्या चैनल और एनसीईआरटी के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर हर शुक्रवार दोपहर 2:30 से 4 बजे तक लाइव संवाद कार्यक्रम आयोजित होता है, जिसमें विशेषज्ञ परीक्षा तनाव, आत्मविश्वास और समय प्रबंधन पर मार्गदर्शन देते हैं।
किताब और ड्रेस खरीदी पर मनमानी नहीं चलेगी
इसके साथ ही जिला शिक्षा अधिकारी किशनदान चारण ने सभी गैर सरकारी शिक्षण संस्थानों को कड़े निर्देश दिए हैं कि अभिभावकों पर किसी विशेष दुकान से पाठ्यपुस्तकें या ड्रेस खरीदने का दबाव न बनाया जाए। यदि कोई स्कूल ऐसी बाध्यता थोपता पाया गया तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। यह निर्णय अभिभावकों को खरीदारी में स्वतंत्र विकल्प देने और अनावश्यक आर्थिक बोझ से बचाने के उद्देश्य से लिया गया है।
शिक्षा विभाग का मानना है कि मनोदर्पण कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए संबल बनेगा और तनावमुक्त माहौल में बेहतर शैक्षणिक परिणाम सुनिश्चित होंगे। साथ ही छात्रों का समग्र मानसिक विकास भी इससे संभव हो सकेगा।
