नई दिल्ली | केंद्र सरकार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों की सुरक्षा और फर्जी कंटेंट पर नियंत्रण को लेकर गंभीर कदम उठाने की तैयारी में है। केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 17 फरवरी को बताया कि सरकार सोशल मीडिया कंपनियों के साथ आयु-सीमा और डीपफेक पर सख्त नियमों को लागू करने को लेकर लगातार बातचीत कर रही है। मंत्री ने कहा कि आयु-आधारित नियम डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट (डीपीडीपी एक्ट) के तहत एक अहम प्रावधान है। इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों के व्यक्तिगत डाटा की सुरक्षा करना और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर उसके दुरुपयोग को रोकना है। इस कानून के तहत कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि नाबालिगों की जानकारी बिना अनुमति के इस्तेमाल न हो।
नकली तस्वीर, वीडियो या आवाज बनाकर गलत जानकारी फैलाना आसान
डीपफेक तकनीक के बढ़ते खतरे पर भी सरकार चिंतित है। डीपफेक के जरिए किसी व्यक्ति की नकली तस्वीर, वीडियो या आवाज बनाकर गलत जानकारी फैलाना आसान हो गया है। अश्विनी वैष्णव ने कहा कि सरकार मौजूदा आईटी नियम 2021 से आगे जाकर और कड़े नियम बनाने पर विचार कर रही है, ताकि फर्जी और भ्रामक कंटेंट पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बहुराष्ट्रीय टेक कंपनियों को भारत के स्थानीय कानूनों और सामाजिक परिस्थितियों का सम्मान करना होगा। सरकार चाहती है कि सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म देश के नियमों के अनुसार काम करें और उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा को प्राथमिकता दें। मंत्री के अनुसार, कई कंपनियां पहले से ही राष्ट्रीय कानूनों के अनुरूप खुद को ढालने की कोशिश कर रही हैं।
डीपफेक पर सख्त नियम होंगे लागू
विशेषज्ञों का मानना है कि उम्र आधारित नियंत्रण और डीपफेक पर सख्त नियम लागू होने से बच्चों और युवाओं को ऑनलाइन धोखाधड़ी, साइबर अपराध और गलत सूचना से बचाया जा सकेगा। साथ ही, यह कदम डिजिटल दुनिया को अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने में मदद करेगा।
इस पहल के जरिए सरकार एक जिम्मेदार और सुरक्षित डिजिटल वातावरण तैयार करना चाहती है, जहां तकनीक का उपयोग समाज के हित में हो और नागरिकों की निजता पूरी तरह सुरक्षित रहे।
