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महाराष्ट्र में 5% मुस्लिम आरक्षण का 2014 आदेश रद्द

By Friday Sanwad
February 20, 2026 2 Min Read
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मुंबई। महाराष्ट्र सरकार के सोशल जस्टिस विभाग ने मंगलवार को एक सरकारी रिज़ॉल्यूशन (जीआर) जारी कर वर्ष 2014 के उस आदेश को औपचारिक रूप से निरस्त कर दिया, जिसमें मुस्लिम समुदाय को शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी व अर्ध-सरकारी नौकरियों में 5 प्रतिशत आरक्षण देने की घोषणा की गई थी। सरकार का कहना है कि यह आदेश पिछले दस वर्षों से प्रभावी नहीं था, इसलिए इसे अब विधिवत रद्द किया गया है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, जुलाई 2014 में तत्कालीन कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन सरकार ने मुसलमानों को 5% आरक्षण देने का फैसला किया था। उस समय मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण थे। यह निर्णय अध्यादेश के माध्यम से लागू करने की कोशिश की गई थी। हालांकि, विधानसभा में छह सप्ताह के भीतर इसे विधेयक के रूप में पारित नहीं कराया जा सका, जिसके कारण अध्यादेश स्वतः निष्प्रभावी हो गया।

नई सरकार ने नौकरी संबंधी मुस्लिम आरक्षण को आगे नहीं बढ़ाया

उसी वर्ष अक्टूबर 2014 में विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में भाजपा-शिवसेना गठबंधन की सरकार बनी। नई सरकार ने नौकरी संबंधी मुस्लिम आरक्षण को आगे नहीं बढ़ाया। इस बीच, आरक्षण के फैसले को अदालत में भी चुनौती दी गई थी। बॉम्बे हाईकोर्ट ने नौकरी में आरक्षण पर रोक लगाई थी, जबकि शिक्षा क्षेत्र में कुछ हद तक राहत दी गई थी। सरकार का तर्क है कि चूंकि अध्यादेश समय पर कानून में परिवर्तित नहीं हुआ और न्यायिक प्रक्रिया भी लंबित रही, इसलिए 2014 का आदेश व्यावहारिक रूप से अमान्य था। ताजा जीआर के जरिए इसे रिकॉर्ड से हटाया गया है।

पिछड़े वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए

विपक्षी दलों ने इस कदम को राजनीतिक बताया है और कहा है कि सामाजिक व शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। वहीं सत्तारूढ़ पक्ष का कहना है कि राज्य की आरक्षण नीति संविधान और न्यायालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही लागू की जाएगी। इस फैसले के बाद राज्य की राजनीति में एक बार फिर आरक्षण का मुद्दा गरमा गया है और विभिन्न संगठनों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

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