नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने नीट-पीजी 2025 की कट-ऑफ में की गई भारी कटौती पर केंद्र सरकार से संतोषजनक जवाब मांगा है। न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा और आलोक अराधे की पीठ ने सोमवार को टिप्पणी की कि कट-ऑफ को लगभग शून्य स्तर तक लाना देश में चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। अदालत ने इस संबंध में दाखिल याचिकाओं पर नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई अगले सप्ताह के लिए निर्धारित की है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पिंकी आनंद, गोपाल शंकरनारायणन और डी. एस. नायडू ने पक्ष रखा, जबकि केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी उपस्थित रहीं।

नीट-पीजी का उद्देश्य न्यूनतम योग्यता की परीक्षा लेना नहीं

केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में कहा कि नीट-पीजी का उद्देश्य न्यूनतम योग्यता की परीक्षा लेना नहीं, बल्कि सीमित सीटों के लिए मेरिट सूची तैयार करना है। सरकार के अनुसार, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग से परामर्श के बाद यह निर्णय लिया, क्योंकि शैक्षणिक सत्र 2025-26 में लगभग 70 हजार सीटों में से कई रिक्त रह गई थीं। वहीं राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड चिकित्सा विज्ञान ने स्पष्ट किया कि कट-ऑफ घटाने का निर्णय उसका नहीं था। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि कट-ऑफ को शून्य या नकारात्मक स्तर तक लाना असंवैधानिक है और इससे मरीजों की सुरक्षा तथा चिकित्सा मानकों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

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