नई दिल्ली। देश में बैंकिंग क्षेत्र में साइबर फ्रॉड और डिजिटल धोखाधड़ी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्डा ने हाल ही में राज्य सभा में यह मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया और सरकार से जवाब मांगा। उपलब्ध आंकड़े चौंकाने वाले हैं। वर्ष 2023 में जहाँ साइबर फ्रॉड की करीब 75,800 शिकायतें दर्ज हुई थीं, वहीं 2024 में यह संख्या उछलकर लगभग 2.92 लाख तक जा पहुँची। यानी महज एक साल में 285 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी। इन मामलों में लोगों को करीब 2100 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार, सबसे अधिक शिकायतें UPI से जुड़े फ्रॉड की हैं। ऑनलाइन भुगतान की सुविधा बढ़ने के साथ-साथ साइबर अपराधियों ने भी अपने तरीके बदल लिए हैं। फर्जी लिंक, कस्टमर केयर के नाम पर ठगी और OTP चोरी जैसे मामले लगातार बढ़ रहे हैं।
पैसे की चोरी के साथ-साथ डेटा चोरी भी एक बड़ी चुनौती बन चुकी है। लोग बैंकों पर भरोसा कर PAN, आधार, जन्मतिथि और अन्य निजी जानकारी साझा करते हैं, लेकिन यह डेटा कितना सुरक्षित है, यह सवाल अभी भी बना हुआ है। 2019 में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के करीब 30 लाख ग्राहकों का डेटा लीक हुआ था। 2021 में डिजिटल वॉलेट कंपनी MobiKwik का लगभग 1.2 टीबी KYC डेटा सार्वजनिक हो गया था।
इसका असर आम जिंदगी पर साफ दिखता है। लोगों को बार-बार क्रेडिट कार्ड, लोन और प्रॉपर्टी से जुड़े अनचाहे फोन आते हैं। यह जानकारी आखिर इन कंपनियों तक कैसे पहुँचती है, यह अब भी एक बड़ा सवाल है। विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ते साइबर अपराधों से निपटने के लिए मजबूत साइबर सुरक्षा तंत्र, जन जागरूकता और सख्त कानूनी प्रावधानों की सख्त जरूरत है। साथ ही आम नागरिकों को भी सतर्क रहकर अपनी निजी जानकारी को सुरक्षित रखना होगा, तभी इस बढ़ती समस्या पर काबू पाया जा सकता है।
