नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव और संघर्ष ने पूरी दुनिया को कई गहरे सबक दिए हैं। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि इस संघर्ष ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वैश्विक राजनीति में सही और गलत से ज्यादा शक्ति का महत्व होता है। जो देश सैन्य, आर्थिक और तकनीकी रूप से मजबूत होता है, दुनिया उसी के पीछे खड़ी होती है। पहला बड़ा सबक यह है कि केवल भावनाओं और आवेश में किया गया संघर्ष कभी सफल नहीं होता। जीत के लिए सुनियोजित रणनीति, मजबूत संसाधन और दूरदर्शी नेतृत्व जरूरी है। जो देश इन तीनों मोर्चों पर तैयार रहता है, वही टिका रहता है। दूसरा अहम संदेश युवाओं की दिशा से जुड़ा है। विशेषज्ञों का सवाल है कि क्या हम अपने युवाओं को जाति, धर्म और नफरत की आग में झोंक रहे हैं या उन्हें शिक्षा, स्टार्टअप, निर्यात और नवाचार की राह दिखा रहे हैं। एक मजबूत राष्ट्र वही बनता है जो अपनी युवा पीढ़ी को हुनर और ज्ञान से लैस करता है। तीसरा और सबसे चौंकाने वाला सबक सोशल मीडिया से जुड़ा है। युद्ध और तनाव के माहौल में सोशल मीडिया कंपनियां सबसे ज्यादा मुनाफा कमाती हैं। लोगों का गुस्सा, डर और भावनाएं इन प्लेटफॉर्म्स के लिए कमाई का जरिया बन जाती हैं। जितनी ज्यादा बहस और शेयरिंग, उतना ज्यादा मुनाफा। ऐसे में देश के युवाओं से अपील है कि वे भावनाओं में बहने के बजाय समझदारी से काम लें, कौशल सीखें और अपने भविष्य की ठोस तैयारी करें। यही किसी भी राष्ट्र की असली ताकत होती है।

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