फ्राइडे संवाद. जयपुर। जकात सामाजिक न्याय और आर्थिक सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम है। इसी दिशा में जकात सेंटर इंडिया की जयपुर इकाई सक्रिय पहल कर रही है। संस्था ने अपील की है कि शहर की जकात जयपुर में ही जरूरतमंदों पर खर्च की जाए, ताकि स्थानीय स्तर पर ठोस बदलाव लाया जा सके। संस्था के वाइस चैयरमैन पप्पू कुरैशी ने बताया कि जकात की राशि को योजनाबद्ध तरीके से शिक्षा, रोजगार सृजन और नशामुक्ति अभियान जैसे क्षेत्रों में लगाया जा रहा है। उनका कहना है कि केवल 2500 से 5000 रुपये की मदद से किसी परिवार के आर्थिक विकास की कल्पना नहीं की जा सकती, लेकिन यदि किसी जरूरतमंद को रोजगार उपलब्ध करा दिया जाए तो वह आत्मनिर्भर बन सकता है और भविष्य में स्वयं जकात देने की स्थिति में आ सकता है।
पहले समाज में सामूहिक जकात देने का प्रचलन था
पप्पू कुरैशी ने इज्तिमाई (सामूहिक) जकात की परंपरा को फिर से मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पहले समाज में सामूहिक जकात देने का प्रचलन था, जिससे बड़ी संख्या में जरूरतमंदों तक व्यवस्थित सहायता पहुंचती थी। पिछले कुछ वर्षों में यह परंपरा कमजोर हुई है, जिसे पुनर्जीवित करने की आवश्यकता है। संस्था द्वारा सहायता प्रक्रिया को पारदर्शी रखने का दावा किया गया है। पहले आवेदकों से फार्म भरवाए जाते हैं, फिर उनकी विस्तृत जांच-पड़ताल की जाती है। सत्यापन के बाद वास्तविक जरूरतमंदों को शिक्षा के लिए फीस सहायता, स्वरोजगार के लिए उपकरण या पूंजी, तथा नशामुक्ति कार्यक्रमों में सहयोग प्रदान किया जाता है।
दो वर्षों में 58,77,317 रुपये की राशि से 100 से अधिक लोगों की मदद
संस्था के अनुसार, पिछले दो वर्षों में 58,77,317 रुपये की राशि से 100 से अधिक लोगों की मदद की गई है। पदाधिकारियों का कहना है कि यदि समाज के सक्षम लोग अपनी जकात संगठित रूप से दें, तो कमजोर तबके के जीवन में स्थायी बदलाव लाया जा सकता है। संस्था ने शहरवासियों से अपील की है कि वे अपनी जकात अधिक से अधिक जयपुर इकाई को दें, ताकि स्थानीय जरूरतमंद परिवारों को सशक्त बनाकर आत्मनिर्भर बनाया जा सके।
