नई दिल्ली
देश के मांस कारोबार को एक नए आयाम देते हुए लिशियस आज डिजिटल मीट डिलीवरी के क्षेत्र में एक अग्रणी नाम बन गई है। पिछले कुछ वर्षों में यह कंपनी हजारों करोड़ रुपये के मूल्यांकन तक पहुंची है और बाजार में एक मजबूत उपस्थिति स्थापित कर चुकी है। भारत में लगभग 70 प्रतिशत लोग मांसाहारी हैं, लेकिन एक गंभीर समस्या यह है कि देश का करीब 90 प्रतिशत मीट कारोबार पूरी तरह असंगठित क्षेत्र में केंद्रित है। आमतौर पर भारतीय परिवार स्थानीय दुकानों से मांस खरीदते हैं, जहां स्वच्छता और गुणवत्ता के प्रति असंतोष एक बड़ी समस्या रहा है। बाजारों में गंदगी, अस्वच्छता और अनियंत्रित वातावरण कई परिवारों के लिए मांस खरीदना एक असहज अनुभव बना देता था।

पॉलिथीन की जगह प्रीमियम पैकेजिंग बॉक्स

इसी समस्या को अवसर में बदलते हुए लिशियस ने अपने आधुनिक और संगठित व्यवसायिक मॉडल को शुरू किया। कंपनी ने मांस को साधारण पॉलिथीन की जगह प्रीमियम पैकेजिंग बॉक्स में पैक करके ग्राहकों तक पहुंचाना शुरू किया। इससे न केवल उत्पाद की गुणवत्ता में सुधार हुआ, बल्कि ग्राहकों के मन में विश्वास और आत्मविश्वास भी बढ़ा। लिशियस ने चिकन और मटन के विभिन्न हिस्सों को मानकीकृत रूप में उपलब्ध कराया, जैसे चिकन ब्रेस्ट, करी कट और बोनलेस पीस। यह कदम ग्राहकों को साफ-सुथरा और तैयार उत्पाद आसानी से उपलब्ध कराता है। ग्राहकों को अब अलग-अलग हिस्सों के लिए अलग दुकानों पर नहीं भटकना पड़ता।

सप्लाई चेन और अत्याधुनिक कोल्ड चेन प्रणाली
कंपनी की सफलता का मूल आधार इसकी मजबूत सप्लाई चेन और अत्याधुनिक कोल्ड चेन प्रणाली है। फार्म से लेकर ग्राहक के घर तक मांस को एक निश्चित तापमान पर सुरक्षित रखा जाता है, जिससे उत्पाद की गुणवत्ता और स्वास्थ्य संबंधी मानदंड बने रहते हैं। यह तकनीकी दक्षता लिशियस को प्रतिद्वंद्वियों से अलग करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि लिशियस ने केवल मांस नहीं बेचा, बल्कि ग्राहकों को सुविधा, स्वच्छता और भरोसा दिया है। इसी कारण ग्राहक सामान्य बाजार की तुलना में अधिक कीमत चुकाने के लिए सहमत हैं। इस प्रकार लिशियस ने असंगठित मांस बाजार को संगठित करते हुए एक सफल और टिकाऊ व्यावसायिक मॉडल प्रस्तुत किया है।

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