नेकी की राह दिखाने वालों को भी मिलता है बराबर का सवाब
इस्लाम केवल स्वयं नेक बनने की शिक्षा नहीं देता, बल्कि दूसरों को भी भलाई की राह दिखाने की प्रेरणा देता है। धार्मिक शिक्षाओं के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति किसी को नेक काम करने, इबादत करने या अच्छे आचरण की ओर मार्गदर्शन करता है, तो उस नेक कार्य को करने वाले के सवाब के बराबर सवाब मार्गदर्शन करने वाले को भी मिलता है। विशेष बात यह है कि इससे उस व्यक्ति के सवाब में कोई कमी नहीं होती। हदीस में उल्लेख है कि जो व्यक्ति किसी नेकी की ओर रहनुमाई करता है, उसे उस नेकी पर अमल करने वाले के बराबर सवाब मिलता है। यही कारण है कि इस्लाम में दावत-ए-खैर, अच्छी सलाह और सकारात्मक संदेश फैलाने को अत्यंत महत्व दिया गया है।
आज सोशल मीडिया लोगों तक संदेश पहुंचाने का सबसे प्रभावी माध्यम बन चुका है। ऐसे में यदि इसका उपयोग नैतिकता, सदाचार, सही दीनी जानकारी और समाज में भलाई फैलाने के लिए किया जाए, तो यह निरंतर सवाब कमाने का माध्यम बन सकता है। वहीं झूठ, अपशब्द, भ्रामक सूचनाएं या अनैतिक सामग्री साझा करना समाज के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। धार्मिक विद्वानों का कहना है कि हर व्यक्ति को चाहिए कि वह अपने व्यवहार, बातचीत और सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को अच्छे कार्यों के लिए प्रेरित करे। एक छोटी-सी नेक बात, सही सलाह या उपयोगी जानकारी किसी के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकती है और उसका लाभ लंबे समय तक मिलता रह सकता है। इसलिए आवश्यकता है कि हम अपने दैनिक जीवन में भलाई के संदेशों को बढ़ावा दें, समाज में नैतिक मूल्यों को मजबूत करें और ऐसे कार्यों का हिस्सा बनें जो इंसानियत, सद्भाव और अच्छे चरित्र को बढ़ावा दें। यही सच्चे अर्थों में समाज और मानवता की सेवा भी है।
(कंटेंट: इस्लामिक थियोलॉजी)