एआई की मदद से ठग बना रहे नकली फोटो, वीडियो और ऑडियो, बिना वेरिफाई किए न करें भरोसा
फ्राइडे संवाद. टेक्नोलॉजी | आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) ने जिंदगी को जितना आसान बनाया है, उतना ही यह प्राइवेसी के लिए खतरा भी बनता जा रहा है। साइबर ठग अब एआई की मदद से डीपफेक वीडियो, फोटो और ऑडियो तैयार कर लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं। ये कंटेंट इतने असली लगते हैं कि आमजन इन्हें असली मानकर धोखे में आ जाते हैं। ऐसे में हर व्यक्ति को डीपफेक की पहचान और उससे बचाव के तरीके आने जरूरी हैं। डीपफेक दरअसल जेनेरेटिव एआई तकनीक पर आधारित है। यह तकनीक लाखों फोटो, वीडियो और ऑडियो से पैटर्न सीखकर किसी व्यक्ति का चेहरा, आवाज और हावभाव कॉपी कर नया कंटेंट तैयार करती है, जो देखने-सुनने में बिल्कुल असली लगता है। सिर्फ फोटो के आधार पर भी एआई टूल्स से डीपफेक वीडियो बनाया जा सकता है, हालांकि जितने ज्यादा फोटो-वीडियो उपलब्ध होते हैं, डीपफेक उतना ही ज्यादा रियल दिखता है। इसी तरह आवाज की भी नकल की जा सकती है, जिसे वॉइस क्लोनिंग या डीपफेक ऑडियो कहा जाता है। इसमें एआई किसी व्यक्ति की कुछ सेकंड की आवाज के सैंपल से उसका बोलने का अंदाज और टोन सीखकर हूबहू आवाज तैयार कर लेता है। ठग इसका इस्तेमाल रिश्तेदार, दोस्त, बॉस या बैंक अधिकारी बनकर पैसे ठगने में करते हैं।
साइबर सिक्योरिटी विशेषज्ञों के मुताबिक डीपफेक के जरिए फर्जी खबरें फैलाना, आइडेंटिटी चोरी, ऑनलाइन ठगी, ब्लैकमेलिंग, बैंकिंग फ्रॉड, फेक वीडियो कॉल और मॉर्फ्ड वीडियो जैसे अपराध किए जा सकते हैं। साइबर ठग आमतौर पर सोशल मीडिया और ऑनलाइन डेटिंग यूजर्स, ऑफिस कर्मचारियों, सेलिब्रिटी व इंफ्लुएंसर्स, बिजनेसमैन के साथ-साथ टीनएजर्स और बुजुर्गों को भी निशाना बनाते हैं।’थ्री फिंगर रूल’ कारगरडीपफेक वीडियो कॉल की पहचान के लिए ‘थ्री फिंगर रूल’ कारगर माना जाता है। इसके तहत वीडियो कॉल पर सामने वाले व्यक्ति से अपने चेहरे के सामने तीन उंगलियां रखने के लिए कहा जाता है। कई बार डीपफेक या फेस-स्वैप सिस्टम ऐसी अचानक की गई एक्टिविटी को सही तरीके से प्रोसेस नहीं कर पाता, जिससे चेहरे पर ग्लिच या विजुअल गड़बड़ी दिखाई दे सकती है। हालांकि विशेषज्ञ आगाह करते हैं कि यह तरीका सौ फीसदी प्रूफ नहीं है, क्योंकि एडवांस्ड एआई कई बार इसे बायपास भी कर सकता है, इसलिए इसे केवल एक क्विक वेरिफिकेशन टूल की तरह ही इस्तेमाल करना चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि डीपफेक स्कैम से बचने का सबसे कारगर तरीका यही है कि बिना वेरिफाई किए किसी भी वीडियो या ऑडियो पर भरोसा न किया जाए। खासकर पैसों के लेन-देन से जुड़ी किसी भी कॉल या मैसेज को लेकर सतर्क रहें और संबंधित व्यक्ति से किसी दूसरे माध्यम से पुष्टि जरूर करें।