पी में मदरसों की उच्च शिक्षा पर रोक, कामिल-फाजिल अब बोर्ड के दायरे से बाहर आतंकवाद से जोड़ने के बयान पर मदनी की कड़ी आपत्ति
फ्राइडे संवाद. प्रयागराज | उत्तर प्रदेश के मदरसे अब उच्च शिक्षा की डिग्री नहीं दे सकेंगे। उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल ने मंगलवार को यूपी मदरसा शिक्षा बोर्ड अधिनियम, 2004 में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इसके तहत अब मदरसा शिक्षा बोर्ड को ग्रेजुएट और पोस्ट-ग्रेजुएट डिग्री के समकक्ष उच्च शिक्षा को रेगुलेट करने या प्रदान करने का अधिकार नहीं रहेगा। विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन की कार्यवाही शुरू होने से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया। संशोधित ढांचे के तहत बोर्ड कक्षा 12 के समकक्ष स्तर तक मदरसा शिक्षा की देखरेख करता रहेगा, जिसमें मुंशी, मौलवी और आलिम जैसे पाठ्यक्रम शामिल हैं, जबकि उच्च शिक्षा श्रेणी में आने वाले कामिल और फाजिल पाठ्यक्रमों को अब अलग उच्च शिक्षा प्रणाली के अंतर्गत लाया जाएगा।
क्या था सुप्रीम कोर्ट का फैसला
अधिकारियों के अनुसार यह संशोधन सुप्रीम कोर्ट के नवंबर 2024 के फैसले के अनुरूप लाया गया है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मार्च 2024 में मदरसा शिक्षा बोर्ड अधिनियम को रद्द कर दिया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने पलटते हुए अधिनियम को बरकरार रखा, लेकिन कामिल और फाजिल जैसे उच्च शिक्षा पाठ्यक्रमों को रेगुलेट करने वाले प्रावधानों को असंवैधानिक करार दिया था। अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार जरूरी संशोधन अब स्वीकृत कर दिए गए हैं। सरकार भविष्य में कामिल-फाजिल पाठ्यक्रमों के संचालन के लिए अलग तंत्र पर काम कर रही है, जिसमें लखनऊ स्थित ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय को भी शामिल करने पर विचार हो रहा है। नियामक ढांचे में बदलाव लंबित होने के कारण 2024 के फैसले के बाद से इन पाठ्यक्रमों में नए प्रवेश नहीं हुए हैं।
मदरसों को आतंकवाद से जोड़ना गलत
इसी बीच जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के उस बयान की कड़ी आलोचना की है, जिसमें मदरसों को आतंकवाद से जोड़ा गया था। मदनी ने इसे संवैधानिक पद की गरिमा के खिलाफ बताते हुए कहा कि मदरसों से निकले उलेमा ने आजादी की लड़ाई में अहम भूमिका निभाई थी और अंग्रेजी शासन के सामने कभी सिर नहीं झुकाया। उन्होंने कहा कि मदरसों से जुड़े लाखों छात्रों, शिक्षकों और पूर्व छात्रों को आतंकवाद से जोड़ना निंदनीय है और इससे सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचता है।