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दिल्ली हाईकोर्ट में मेटा के “राइट्स मैनेजर” टूल को लेकर विवाद

By Friday Sanwad
August 13, 2026 3 Min Read
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सोशल मीडिया पर कंटेंट चोरी रोकने के लिए मेटा का “राइट्स मैनेजर” एक महत्वपूर्ण टूल माना जाता है। यह क्रिएटर्स और कॉपीराइट धारकों को उनके मूल कंटेंट की पहचान करने और बिना अनुमति दोबारा अपलोड किए गए कंटेंट पर कार्रवाई करने में मदद करता है। लेकिन अब इसी टूल तक पहुंच और उसके इस्तेमाल को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने मेटा से जवाब मांगा है। यह मामला कंटेंट क्रिएटर और बिजनेस कोच मोहित कुमार की याचिका से जुड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया है कि उनके अकाउंट के खिलाफ कथित तौर पर फर्जी कॉपीराइट स्ट्राइक का इस्तेमाल किया गया और बाद में उनसे पैसे वसूलने की कोशिश की गई।

बड़े क्रिएटर को राइट्स मैनेजर क्यों नहीं?

मोहित कुमार की ओर से कोर्ट में पेश वकील ने दावा किया कि बड़ी संख्या में फॉलोअर्स और व्यूज वाले क्रिएटर्स को भी राइट्स मैनेजर का एक्सेस नहीं दिया जा रहा है। कुमार ने इस टूल के लिए तीन बार आवेदन किया, लेकिन हर बार उनका अनुरोध खारिज कर दिया गया। वकील का आरोप था कि कथित स्कैमर्स इसी सिस्टम का इस्तेमाल वास्तविक क्रिएटर्स के खिलाफ कॉपीराइट स्ट्राइक जारी करने के लिए कर रहे हैं।
इस पर जस्टिस अनूप जयराम भंभानी ने मेटा से उसकी नीति, गाइडलाइंस और राइट्स मैनेजर की पात्रता के नियम अदालत के सामने रखने को कहा। मेटा की ओर से कहा गया कि कंपनी इन शर्तों और कुमार को एक्सेस न देने के आधार को रिकॉर्ड पर रखेगी।

व्यूज में भारी गिरावट

कोर्ट को बताया गया कि कथित कॉपीराइट स्ट्राइक शुरू होने से पहले मोहित कुमार के कंटेंट को हर महीने करीब 7-8 करोड़ व्यूज मिल रहे थे, जो बाद में घटकर लगभग 3 लाख व्यूज प्रति माह रह गया। कुमार के वकील ने अदालत को समझाया कि राइट्स मैनेजर किस तरह काम करता है — क्रिएटर के ओरिजिनल कंटेंट को सिस्टम में पहचानने के बाद अगर कोई दूसरा व्यक्ति वही या मिलता-जुलता कंटेंट अपलोड करता है, तो यह टूल उसका पता लगा सकता है, जिसके बाद अधिकार रखने वाला व्यक्ति कंटेंट ब्लॉक करने या स्ट्राइक लगाने जैसी कार्रवाई कर सकता है।

मेटा का पक्ष और कोर्ट की तीखी टिप्पणी

मेटा की ओर से कहा गया कि राइट्स मैनेजर का एक्सेस वेरिफिकेशन प्रक्रिया के अधीन है, क्योंकि किसी के कंटेंट पर अधिकार का दावा सही है या किसी अन्य का, यह तुरंत तय करना हमेशा संभव नहीं होता। हालांकि कोर्ट ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाया। जस्टिस भंभानी ने टिप्पणी की कि जिन क्रिएटर्स की बड़ी फॉलोइंग और व्यूअरशिप है, उन्हें इस तरह के एंटी-प्लेजरिज्म टूल का एक्सेस मिलना चाहिए। अदालत ने इस स्थिति की तुलना “घर के मालिक को नहीं, चोर को चाबी देने” जैसी स्थिति से की।

पहले की स्ट्राइक रिवर्स हुई

मेटा ने बताया कि तकनीकी जांच के बाद कुमार के अकाउंट पर लगाई गई स्ट्राइक हटा दी गई है, और उनका अकाउंट कभी सस्पेंड नहीं किया गया था। अब अदालत मेटा की नीतियों और राइट्स मैनेजर तक पहुंच के नियमों की जांच करेगी। साथ ही, कोर्ट एक अन्य मामले के संदर्भ में यह भी विचार कर रही है कि कॉपीराइट स्ट्राइक के आधार पर अकाउंट सस्पेंड करना आईटी एक्ट की धारा 79 और सुप्रीम कोर्ट के श्रेया सिंघल फैसले से जुड़े प्रावधानों के अनुरूप है या नहीं।

मेटा के खिलाफ बढ़ते मामले

यह अकेला मामला नहीं है। दिल्ली हाईकोर्ट में मेटा के कॉपीराइट स्ट्राइक सिस्टम के कथित दुरुपयोग से जुड़े कई मामले सामने आ चुके हैं। कंटेंट क्रिएटर नितिन जोशी ने एक PIL में फर्जी इंस्टाग्राम कॉपीराइट स्ट्राइक के जरिए कथित संगठित वसूली के रैकेट का आरोप लगाया है। इसके अलावा क्रिएटर्स मोहम्मद नवाज शेख और प्रतीक सहनी से जुड़े मामले भी अदालत के सामने हैं।
इस तरह राइट्स मैनेजर की पात्रता, कॉपीराइट स्ट्राइक की सत्यता और शिकायतों की जांच प्रक्रिया पर अब अदालत की नजर है, जिससे यह सवाल भी अहम हो गया है कि कंटेंट सुरक्षा के लिए बनाया गया सिस्टम कहीं खुद क्रिएटर्स के लिए परेशानी का कारण तो नहीं बन रहा।

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