गॉल टेस्ट जीत के बाद WTC तालिका में भारत पांचवें स्थान पर, फाइनल की उम्मीदें फिर जिंदा श्रीलंका को 165 रन से हराकर सीरीज में 1-0 की बढ़त, अंक प्रतिशत 48.15 से बढ़कर 53.33 प्रतिशत हुआ
फ्राइडे संवाद. कोलंबो। श्रीलंका के खिलाफ गॉल टेस्ट में 165 रन की शानदार जीत ने भारत को विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (डब्ल्यूटीसी) 2025-27 की अंक तालिका में बड़ी राहत दी है। भारत ने श्रीलंका के सामने 372 रन का लक्ष्य रखा था, जिसके जवाब में भारतीय गेंदबाजों के शानदार प्रदर्शन के आगे मेजबान टीम 206 रन पर ही सिमट गई। इस जीत के साथ टीम इंडिया ने दो मैचों की टेस्ट सीरीज में श्रीलंका पर 1-0 की बढ़त बना ली है। सीरीज का दूसरा मुकाबला 23 अगस्त से कोलंबो में खेला जाएगा।
पडिक्कल की शतकीय पारी और स्पिनरों का दबदबा
गॉल टेस्ट में भारत की बल्लेबाजी की नींव देवदत्त पडिक्कल के शानदार 167 रन ने रखी। इसके बाद दूसरी पारी में भी भारतीय बल्लेबाजों ने जरूरी योगदान दिया। गेंदबाजी में स्पिनरों ने श्रीलंका पर लगातार दबाव बनाए रखा, जिसकी बदौलत टीम इंडिया ने मुकाबले को अपने नाम किया।
अंक तालिका में कहां पहुंचा भारत
जीत के साथ भारत के खाते में 12 अंक जुड़े और अब उसके कुल 64 अंक हो गए हैं, जबकि अंक प्रतिशत 48.15 से बढ़कर 53.33 प्रतिशत हो गया है। भारत 10 मैचों में पांच जीत, चार हार और एक ड्रॉ के साथ पांचवें स्थान पर बना हुआ है। ऑस्ट्रेलिया 77.78 अंक प्रतिशत के साथ शीर्ष पर है, दक्षिण अफ्रीका 75 प्रतिशत के साथ दूसरे और न्यूजीलैंड 72.22 प्रतिशत के साथ तीसरे स्थान पर है। बांग्लादेश 66.67 प्रतिशत के साथ चौथे स्थान पर है, जबकि श्रीलंका को गॉल में मिली हार से नुकसान हुआ है और उसका अंक प्रतिशत घटकर 33.33 प्रतिशत रह गया है।
भारत के अब आठ टेस्ट बाकी, फाइनल के लिए बनेंगे अहम समीकरण
इस चक्र में भारत के अब आठ मुकाबले बाकी हैं, जिनमें श्रीलंका के खिलाफ एक टेस्ट, न्यूजीलैंड के खिलाफ दो टेस्ट और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ घरेलू सरजमीं पर पांच टेस्ट शामिल हैं। फाइनल में पहुंचने के लिए कोई तय कटऑफ नहीं है, लेकिन पिछले चक्रों के अनुसार 60 से 70 प्रतिशत के बीच का अंक प्रतिशत टीमों को मजबूत स्थिति में रखता है। अगर भारत बाकी आठ में से सात टेस्ट जीतता है, तो अंक प्रतिशत 68.52 से 70.37 प्रतिशत के बीच पहुंच जाएगा, जिससे फाइनल की जगह लगभग सुरक्षित मानी जा सकती है। वहीं छह मैच जीतने पर भारत की स्थिति मजबूत बनी रहेगी, लेकिन दो या तीन हार होने पर टीम की राह मुश्किल हो सकती है और उसे दूसरी टीमों के नतीजों पर निर्भर रहना पड़ेगा।