राजस्थान नगर निकाय चुनाव: मुस्लिम राजनीति की दशा और दिशा पर उठे नए सवाल
कांग्रेस को भरपूर समर्थन, पर सभापति की कुर्सी पर हिस्सेदारी नहीं; डीडवाना से बीकानेर तक दिखा वोट और सत्ता का असंतुलन
फ्राइडे संवाद. जयपुर | राजस्थान नगर निकाय चुनावों के नतीजों ने प्रदेश की मुस्लिम राजनीति की दशा और दिशा पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। पारंपरिक रूप से मुस्लिम मतदाता कांग्रेस या निर्दलीय उम्मीदवारों के पक्ष में अधिक नजर आते रहे हैं, लेकिन बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों में यह वोट बैंक भी बिखरता दिखाई दे रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस कांग्रेस को मुस्लिम समुदाय का शत-प्रतिशत वोट मिलने की बात कही जाती है, उसने कई जगह पार्षदों के बहुमत में आने के बावजूद सभापति पद पर मुस्लिम चेहरा नहीं उतारा। यानी वोट पूरा मिला, लेकिन राजनीतिक हिस्सेदारी सम्मानजनक नहीं रही।
टोंक-लक्ष्मणगढ़ में उठी नाराजगी
मुस्लिम बहुल टोंक और लक्ष्मणगढ़ विधानसभा क्षेत्र इसका उदाहरण हैं, जहां सभापति पद पर मुस्लिम उम्मीदवार नहीं उतारा गया। टोंक से पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट विधायक हैं, जबकि लक्ष्मणगढ़ से प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा विधायक हैं। हालांकि विरोध के बाद दोनों जगह उपसभापति मुस्लिम समाज से बनाया गया। ऐसा ही मामला डीडवाना विधानसभा क्षेत्र में भी देखने को मिला।
डीडवाना: 17 मुस्लिम पार्षद जीते, फिर भी सभापति नहीं
डीडवाना नगर परिषद चुनाव में 17 पार्षद मुस्लिम समाज से जीते, बावजूद इसके सभापति पद पर कोई मुस्लिम प्रत्याशी नहीं बैठ सका। कांग्रेस 16 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी, लेकिन बहुमत के 21 के आंकड़े के लिए जरूरी पांच वोट नहीं जुटा सकी और उसके उम्मीदवार बाबू खान चुनाव हार गए। वहीं निर्दलीय विधायक यूनुस खान के खेमे के 14 निर्दलीय पार्षदों ने नौ सीटें जीतने वाली भारतीय जनता पार्टी से गठबंधन कर लिया। यूनुस खान के समर्थन से भंवरलाल पंवार भाजपा के सिंबल पर मैदान में उतरे और कुल 24 वोट हासिल कर सभापति चुने गए, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी को 16 वोट मिले, यानी आठ वोटों की जीत। उपसभापति पद पर भी भाजपा के हरीश मोदी ने जीत दर्ज की।
भाजपा से दरकिनार, फिर भी भाजपा के साथ
गौरतलब है कि 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा दो बार यूनुस खान का डीडवाना से टिकट काट चुकी है और उन्हें सरकार में भी शामिल नहीं किया गया। इसके बावजूद वे पार्टी के प्रति सहयोगी रुख अपनाते नजर आए।
बीकानेर: बहुमत के बावजूद क्रॉस वोटिंग से हारी कांग्रेस
बीकानेर नगर निगम के उपमहापौर चुनाव में कांग्रेस की अधिकृत उम्मीदवार नसीम बानो को हार का सामना करना पड़ा और भाजपा के पंकज गहलोत विजयी रहे। वार्ड नंबर 66 से पार्षद नसीम बानो को पार्टी ने आधिकारिक उम्मीदवार बनाया था। रिपोर्ट्स के अनुसार, पूर्ण बहुमत या पर्याप्त संख्या बल होने के बावजूद क्रॉस वोटिंग के कारण कांग्रेस उम्मीदवार यह चुनाव हार गईं।
मेयर पद पर कांग्रेस की जीत के बाद डिप्टी मेयर चुनाव में बहुमत के बावजूद मिली हार पार्टी के भीतर मुद्दा बन गई। बीकानेर कांग्रेस ने इस मामले को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मुलाकात की। पार्टी ने दिल्ली से अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के सचिव एवं राजस्थान के सह-प्रभारी चिरंजीव राव को बीकानेर भेजा है। उधर, शहर कांग्रेस अध्यक्ष मदन गोपाल मेघवाल ने हार की उच्च स्तरीय जांच के लिए प्रदेश अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा को पत्र भेजा है।
जवाबदेही तय करने की जरूरत
इस मामले में महापौर अनिल कल्ला और पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला की जवाबदेही तय करने की जरूरत है। कुल मिलाकर टोंक-लक्ष्मणगढ़, डीडवाना और बीकानेर के घटनाक्रम ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जिस समाज का समर्थन पार्टियों को मिलता है, उसे सत्ता में उचित भागीदारी कब मिलेगी? क्या मुस्लिम राजनीति को अब नए सिरे से अपनी रणनीति तय करनी होगी।