सीजेपी प्रोटेस्ट के लिए दिल्ली में तैनात होंगे 23 हजार सीएपीएफ जवान
‘जंतर-मंतर 2.0’ से पहले 221 कंपनियां उपलब्ध, किसान आंदोलन से भी ज्यादा बड़ी तैनाती
नई दिल्ली
मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर सीजेपी के 10 अक्टूबर से प्रस्तावित ‘जंतर-मंतर 2.0’ प्रदर्शन से पहले दिल्ली में केंद्रीय सुरक्षा बलों की बड़े पैमाने पर तैनाती की तैयारी है। रिपोर्ट के अनुसार गृह मंत्रालय ने 8 से 12 अक्टूबर के बीच दिल्ली पुलिस को 221 सीएपीएफ कंपनियां उपलब्ध कराई हैं, जिनमें करीब 23 हजार जवान शामिल हैं। इनके अलावा कम से कम 15 हजार दिल्ली पुलिसकर्मी भी तैनात किए जाने की जानकारी है।
8 से 12 अक्टूबर तक तैनाती
दि प्रिंट ने सुरक्षा प्रतिष्ठान से जुड़े एक सूत्र के हवाले से बताया है कि दिल्ली में जारी प्रदर्शनों और कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए अतिरिक्त केंद्रीय बल उपलब्ध कराने का फैसला किया गया है। 8 से 12 अक्टूबर के बाद इन कंपनियों को उनकी मूल तैनाती वाली जगहों पर वापस भेजने की योजना है।
इन 221 कंपनियों में से 111 जुलाई में हुए सीजेपी प्रदर्शन को देखते हुए पहले ही दिल्ली पुलिस को दी गई थीं, जबकि 110 अतिरिक्त कंपनियों को 6 अक्टूबर को मंजूरी मिली। यानी एक हिस्सा पहले से दिल्ली में उपलब्ध बलों का है और दूसरा अब अतिरिक्त रूप से मंजूर हुआ है।
किन बलों की कंपनियां शामिल
रिपोर्ट के अनुसार पहले से उपलब्ध 111 कंपनियों में बीएसएफ की 41, आईटीबीपी की 18, एसएसबी की 16, रैपिड एक्शन फोर्स की 13, सीआरपीएफ की 12 (जिनमें 5 महिला कंपनियां) और सीआईएसएफ की 11 कंपनियां हैं। 6 अक्टूबर को मंजूर 110 कंपनियों में सीआरपीएफ की 85, एसएसबी की 10, आरएएफ की 7, आईटीबीपी की 7 और सीआईएसएफ की एक कंपनी शामिल है।
तीन राज्यों से बुलाई गईं कंपनियां
रिपोर्ट में कहा गया है कि सीआरपीएफ की कंपनियों को ऐसे इलाकों से दिल्ली लाया जा रहा है, जहां वे पहले से सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़े अहम काम कर रही थीं। जम्मू-कश्मीर के जम्मू क्षेत्र में कुल 137 कंपनियां तैनात थीं, जिनमें से 20 दिल्ली भेजी जा रही हैं।
पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद से तैनात 65 कंपनियों में से 40 को दिल्ली के लिए वापस बुलाए जाने की जानकारी सामने आई है। छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोधी अभियानों के लिए 157 सीआरपीएफ कंपनियां तैनात हैं, जिनमें से 22 को दिल्ली की कानून-व्यवस्था ड्यूटी के लिए बुलाया जा रहा है।
दिल्ली पुलिस के 15 हजार जवान भी
केंद्रीय बलों के अलावा कई सूत्रों के मुताबिक कम से कम 15 हजार दिल्ली पुलिसकर्मी जमीन पर तैनात होंगे। यानी 10 अक्टूबर से शुरू होने वाले प्रदर्शन के दौरान केंद्रीय बल और स्थानीय पुलिस, दोनों की बड़ी मौजूदगी रहने की संभावना है। माना जा रहा है कि अतिरिक्त बल इसलिए दिए गए हैं, ताकि किसी अप्रिय घटना को रोका जा सके। पुलिस के आकलन में अतिरिक्त बलों की जरूरत महसूस हुई, जिसके बाद 8 से 12 अक्टूबर की तैनाती को मंजूरी दी गई।
किसान आंदोलन से भी बड़ी तैनाती
यह पहली बार नहीं है जब सीजेपी के प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली में बड़ी संख्या में केंद्रीय बल लगाए जा रहे हैं। जुलाई के प्रदर्शन के दौरान 150 सीएपीएफ कंपनियां तैनात थीं और तब पश्चिम बंगाल व छत्तीसगढ़ से भी बलों को एयरलिफ्ट करके दिल्ली लाया गया था। जुलाई में दी गई 111 कंपनियां बाद में सितंबर में हुए ब्रिक्स समिट के दौरान भी दिल्ली में मौजूद रहीं।
तुलना करें तो 2020-21 के किसान आंदोलन के दौरान दिल्ली में 93 सीएपीएफ कंपनियां तैनात की गई थीं। मौजूदा 221 कंपनियों का आंकड़ा न केवल उससे काफी ज्यादा है, बल्कि जुलाई के सीजेपी प्रदर्शन की 150 कंपनियों से भी अधिक है।
क्या है ‘जंतर-मंतर 2.0’
सीजेपी ने 10 अक्टूबर से दिल्ली में नए आंदोलन का ऐलान किया है, जिसे ‘जंतर-मंतर 2.0’ नाम दिया गया है। प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा है। संगठन का आरोप है कि मतदाता सूची के एसआईआर की प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ियां हुई हैं। उसका कहना है कि एसआईआर के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाने और फॉर्म 6 से जुड़े विवादों ने मतदान के अधिकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।