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उस्मानी साम्राज्य के महान सुल्तान अब्दुल हमीद द्वितीय: आधुनिक तुर्की के जनक

By Friday Sanwad
January 9, 2026 2 Min Read
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इस्तांबुल
उस्मानी साम्राज्य के 34वें सुल्तान अब्दुल हमीद द्वितीय (1842-1918) को आधुनिक तुर्की का संस्थापक और सुधारक माना जाता है। उन्होंने 1876 से 1909 तक 33 वर्षों तक शासन किया, जब साम्राज्य पतन के कगार पर था और यूरोपीय शक्तियां इसे विभाजित करने की योजना बना रही थीं। अब्दुल हमीद द्वितीय ने 31 अगस्त 1876 को अपने भाई मुराद पांचवें के अपदस्थ होने के बाद गद्दी संभाली। उस समय साम्राज्य गंभीर वित्तीय संकट, बाल्कन में विद्रोह और यूरोपीय दबाव का सामना कर रहा था। रूस के साथ 1877-78 के युद्ध में हार के बाद रोमानिया, सर्बिया, मोंटेनेग्रो और बुल्गारिया स्वतंत्र हो गए। इन चुनौतियों के बावजूद, सुल्तान ने साम्राज्य को संभालने और आधुनिक बनाने का संकल्प लिया।

क्रांतिकारी सुधार और आधुनिकीकरण

सुल्तान अब्दुल हमीद ने शासन संभालते ही पहली उस्मानी संविधान लागू की, जो उस समय एक प्रगतिशील कदम था। उन्होंने अर्थव्यवस्था, शिक्षा, सेना और बुनियादी ढांचे में व्यापक सुधार किए।
उनकी सबसे महत्वपूर्ण परियोजनाओं में हीजाज रेलवे शामिल है, जो दमिश्क से मक्का-मदीना तक जाती थी और हज यात्रियों की सुविधा के लिए बनाई गई थी। इसके अलावा रेलवे नेटवर्क, पुल, अस्पताल, स्कूल, तारघर और तकनीकी शिक्षा संस्थानों की स्थापना की। सुल्तान ने पैन-इस्लामवाद की नीति अपनाई और खलीफा के रूप में दुनिया भर के मुसलमानों को एकजुट करने का प्रयास किया। इस नीति से साम्राज्य की अंतरराष्ट्रीय स्थिति मजबूत हुई।

1909 में सुल्तान को कर गया अपदस्थ

हालांकि सुल्तान अब्दुल हमीद के शासन में सुधार हुए, लेकिन उनकी निरंकुश शासन शैली विवादास्पद रही। उन्होंने एक मजबूत जासूसी तंत्र स्थापित किया, जिसे ‘हमिदिया अत्याचार’ कहा गया। आर्मेनियाई नरसंहार के लिए उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा। 1908 में युवा तुर्क क्रांति ने संविधान को फिर से बहाल किया और 1909 में सुल्तान को अपदस्थ कर दिया गया। निर्वासन में 10 फरवरी 1918 को उनका निधन हो गया।

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