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देश

स्कूली बच्चों की सेहत पर वैश्विक अध्ययन: लंबाई और बीएमआई में देशों के बीच 20 सेमी तक का अंतर

By Friday Sanwad
January 23, 2026 2 Min Read
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नई दिल्ली। प्रतिष्ठित चिकित्सा पत्रिका ‘द लैंसेट’ में प्रकाशित एक बड़े वैश्विक अध्ययन में स्कूली उम्र के बच्चों की शारीरिक वृद्धि और पोषण स्थिति में देशों के बीच चौंकाने वाला अंतर सामने आया है। 1985 से 2019 तक 200 देशों के 6.5 करोड़ से अधिक बच्चों और किशोरों के डेटा पर आधारित इस अध्ययन में 2,181 जनसंख्या-आधारित सर्वे शामिल किए गए। अध्ययन के अनुसार, 2019 में 19 साल के किशोरों की औसत लंबाई में देशों के बीच 20 सेंटीमीटर तक का अंतर पाया गया। लड़कों में सबसे लंबे किशोर नीदरलैंड, मोंटेनेग्रो, एस्टोनिया और बोस्निया-हर्जेगोविना में थे, जबकि सबसे छोटे तिमोर-लेस्ते, लाओस, सोलोमन द्वीप और पापुआ न्यू गिनी में पाए गए। लड़कियों के मामले में नीदरलैंड, मोंटेनेग्रो, डेनमार्क और आइसलैंड शीर्ष पर रहे, जबकि ग्वाटेमाला, बांग्लादेश, नेपाल और तिमोर-लेस्ते में सबसे कम लंबाई दर्ज की गई।

भारत, बांग्लादेश, इथियोपिया और चाड में सबसे कम

बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) में भी व्यापक अंतर देखा गया। प्रशांत द्वीप देशों, कुवैत, बहरीन, अमेरिका और न्यूजीलैंड में बच्चों का औसत बीएमआई सबसे अधिक था, जबकि भारत, बांग्लादेश, इथियोपिया और चाड में सबसे कम। बीएमआई यह दर्शाता है कि बच्चा अपनी लंबाई के अनुपात में उचित वजन का है या नहीं। शोध में यह भी पाया गया कि कुछ देशों में बच्चे पांच साल की उम्र में स्वस्थ होते हैं, लेकिन बड़े होते-होते या तो उनकी लंबाई कम रह जाती है या वजन अत्यधिक बढ़ जाता है। वहीं कुछ देशों में किशोरावस्था में बच्चे तेजी से विकास करते हैं।
शोधकर्ताओं का कहना है कि यह अंतर पोषण, सामाजिक-आर्थिक स्थिति और पर्यावरणीय कारकों से जुड़ा है। उन्होंने सिफारिश की है कि पोषण कार्यक्रमों को केवल पांच साल से कम उम्र के बच्चों तक सीमित न रखकर स्कूली बच्चों और किशोरों तक विस्तारित किया जाए, ताकि वे स्वस्थ वयस्क बन सकें।

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