नई दिल्ली। राजधानी के तुर्कमान गेट इलाके में स्थित ऐतिहासिक फैज-े-इलाही मस्जिद के आसपास अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई विवाद में तब्दील हो गई है। स्थानीय मुस्लिम समुदाय आरोप लगा रहा है कि प्रशासन ने बिना पर्याप्त सूचना और न्यायिक प्रक्रिया का इंतजार किए अचानक बुलडोजर चलाया, जिससे धार्मिक संवेदनाओं को ठेस पहुंची। स्थानीय लोगों का कहना है कि मामला अदालत में विचाराधीन था, ऐसे में किसी भी कार्रवाई से पहले न्यायिक फैसले का इंतजार करना संवैधानिक दृष्टि से उचित था। समुदाय के प्रतिनिधियों ने इस कार्रवाई को एकतरफा और असंवेदनशील बताया है। घटना के बाद दिल्ली पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और वायरल वीडियो के आधार पर 30 लोगों की पहचान की है। धारा 163 बीएनएस के तहत पूरे क्षेत्र में निषेधाज्ञा लागू है और पुलिस टीमें छापेमारी कर रही हैं।

राजनीतिक दलों ने उठाई आवाज

समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी, जो घटना से पहले मौके पर मौजूद थे, को दिल्ली पुलिस समन भेजने की तैयारी कर रही है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा, “अतिक्रमण हटाने के नाम पर मस्जिदों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। धार्मिक स्थलों के मामले में संवैधानिक मर्यादा और संवेदनशीलता जरूरी है। यह केवल कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि सामाजिक सद्भाव का प्रश्न है।” राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने आधी रात को की गई कार्रवाई को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा, “जिस तरह से इस मामले को पेश किया जा रहा है, वह समाज में विभाजन को बढ़ावा देता है। संवैधानिक मूल्यों का सम्मान होना चाहिए।” एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने दिल्ली वक्फ बोर्ड से सुप्रीम कोर्ट जाने का आह्वान करते हुए कहा कि वक्फ संपत्तियों की कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।

समुदाय में गहरी नाराजगी

मस्जिद से जुड़े लोगों और स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे कानून का सम्मान करते हैं, लेकिन उन्हें उचित सुनवाई और न्याय का अधिकार मिलना चाहिए। समुदाय में व्याप्त आक्रोश के बीच लोग शांतिपूर्ण तरीके से अपने संवैधानिक अधिकारों की मांग कर रहे हैं। विवाद के बीच राजनीतिक घमासान भी जारी है।

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