दो साल बाद शेख हसीना का वर्चुअल संबोधन, बोलीं- जेल भेजें या मार दें, दिसंबर में लौटूंगी देश बांग्लादेश सरकार ने जताई आपत्ति
फ्राइडे संवाद. ढाका | बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने दो साल बाद बुधवार को अपने समर्थकों को वर्चुअली संबोधित किया। भाषण के दौरान उनका कैमरा बंद रहा। करीब 25 मिनट तक चले इस संबोधन में उन्होंने कहा कि उन्हें पता है कि सत्ता में बैठे लोग उन्हें जेल में डाल सकते हैं या मार भी सकते हैं, लेकिन इसके बावजूद वे दिसंबर में बांग्लादेश वापस लौटेंगी। उन्होंने कहा कि लोगों का समर्थन उनके लिए सबसे जरूरी है और मौत की सजा, झूठे मुकदमे तथा दिखावटी सुनवाई उन्हें डरा नहीं सकती। हसीना के अनुसार उनके खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई गैरकानूनी, असंवैधानिक और राजनीतिक मकसद से प्रेरित है।
इच्छा से नहीं छोड़ा था देश
हसीना ने यह भी कहा कि उन्होंने अपनी इच्छा से बांग्लादेश नहीं छोड़ा था। उनके अनुसार जब प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री आवास की ओर बढ़ रहे थे, तब उनके पास वहां से निकलने के लिए महज 30 से 40 मिनट का समय बचा था। उस वक्त उन्हें अंदाजा नहीं था कि उन्हें देश ही छोड़ना पड़ेगा। वे अपने पैतृक गांव तुंगीपाड़ा जाने की तैयारी कर रही थीं, लेकिन हालात ऐसे बने कि उन्हें देश छोड़ना पड़ा। उन्होंने 2024 के छात्र आंदोलन को भी शांतिपूर्ण मानने से इनकार किया और आरोप लगाया कि इसके जरिए हिंसा फैलाई गई तथा छात्रों को हथियार बनाया गया।
बांग्लादेश सरकार ने जताई आपत्ति
हसीना के भाषण के बाद बांग्लादेश सरकार ने एक बयान जारी कर आपत्ति जताई। सरकार ने कहा कि नरसंहार की दोषी शेख हसीना को दिल्ली में मीडिया से संवाद करने की अनुमति दिए जाने से बांग्लादेश आहत है। गौरतलब है कि शेख हसीना अगस्त 2024 से भारत में रह रही हैं। छात्र आंदोलन के बाद उनकी सरकार गिर गई थी, जिसके बाद उन्हें ढाका छोड़ना पड़ा था। पिछले साल नवंबर में ढाका के एक विशेष ट्रिब्यूनल ने 2024 के आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई को लेकर मानवता के खिलाफ अपराध के मामले में उन्हें गैरहाजिरी में मौत की सजा सुनाई थी। इसके बाद से बांग्लादेश सरकार लगातार भारत से उनके प्रत्यर्पण की मांग कर रही है।
पूर्व क्रिकेटर शाकिब के घर आगजनी की कोशिश
इससे पहले हसीना की मीटिंग में शामिल पूर्व क्रिकेटर और पूर्व सांसद शाकिब अल हसन के घर पर कुछ लोगों ने आग लगाने की कोशिश की। दावा किया जा रहा है कि हमलावरों ने पेट्रोल बम और ईंट-पत्थर फेंके। विशेषज्ञों के अनुसार इस घटना ने बांग्लादेश में जारी राजनीतिक तनाव को एक बार फिर उजागर कर दिया है।