यूसीसी के विरोध में उतरी जमीयत उलेमा-ए-हिंद, जयपुर, सीकर और सवाई माधोपुर में कलेक्टर को सौंपे ज्ञापन पर्सनल लॉ सुरक्षा और यूसीसी ड्राफ्ट सार्वजनिक कर जनसुनवाई कराने की मांग
फ्राइडे संवाद | जयपुर में समान नागरिक संहिता के प्रस्तावित क्रियान्वयन को लेकर जमीयत उलमा-ए-हिंद जयपुर ने अतिरिक्त जिला कलेक्टर राजीव द्विवेदी को ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने पर्सनल लॉ सुरक्षा की मांग रखते हुए कहा कि भारत विविध संस्कृतियों, परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं वाला देश है तथा संविधान के अनुच्छेद 25 से 29 नागरिकों को धर्म पालन और परंपराएं बनाए रखने का अधिकार देते हैं। मुस्लिम पर्सनल लॉ विवाह, तलाक और विरासत जैसे विषय धार्मिक सिद्धांतों पर आधारित है, इसलिए इसमें हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। प्रतिनिधिमंडल में जमीयत के वाइस प्रेसिडेंट हाफिज मंजूर खान, जनरल सेक्रेटरी मुफ्ती शफीक कायमखानी, मौलाना अब्दुल हमीद, मौलवी इरशाद और एडवोकेट कयामतुल्लाह खान मौजूद थे। वही सवाई माधोपुर में भी जमीयत उलेमा-ए-हिंद की ओर से जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि यूसीसी का मसौदा सार्वजनिक कर आम जनता की राय जानने के लिए जनसुनवाई कराई जाए, ताकि सभी वर्गों के विचार कानून बनाने की प्रक्रिया में शामिल हो सकें।
सीकर: यूसीसी को बताया धार्मिक आजादी का उल्लंघन
सीकर में जमीयत उलेमा-ए-राजस्थान के उपाध्यक्ष मौलाना यूनुस कासमी के नेतृत्व में खुर्शीद अहमद, कासम खिलजी, मौलाना जमशेद सहित अन्य लोगों ने एडीएम राकेश कुमार मीणा से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। खुर्शीद अहमद ने कहा कि सरकार ने अभी तक यूसीसी का मसौदा तैयार नहीं किया है, फिर भी उससे पहले ही लोगों की सहमति-असहमति मांगी जा रही है, जो ‘बैकडोर एंट्री’ के जरिए धार्मिक आजादी का उल्लंघन और असंवैधानिक है। मौलाना यूनुस कासमी ने कहा कि भारत में यूसीसी संभव नहीं है, इससे मौलिक अधिकारों का हनन होगा और अगर यह कानून लागू होता है तो इसके खिलाफ हरसंभव लड़ाई लड़ी जाएगी।