वसुंधरा राजे बोलीं—दुश्मनी जमकर करो, लेकिन बातचीत की एक खिड़की हमेशा खुली रखो विधानसभा के 75 साल पूरे होने पर अमृत महोत्सव में पूर्व मुख्यमंत्री ने साझा किए सियासी अनुभव
फ्राइडे संवाद. जयपुर
राजस्थान विधानसभा के 75 साल पूरे होने पर बुधवार को आयोजित अमृत महोत्सव में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने अपने राजनीतिक अनुभवों को साझा करते हुए एक अहम सियासी सीख दी। उन्होंने कहा कि राजनीति में विरोधियों से मतभेद और प्रतिस्पर्धा भले ही जमकर हो, लेकिन आपसी संवाद के लिए हमेशा एक खिड़की खुली रखनी चाहिए, ताकि जब कभी आमने-सामने मिलना पड़े तो शर्मिंदा न होना पड़े।
अपनी बात को पुख्ता करने के लिए वसुंधरा राजे ने पूर्व उपप्रधानमंत्री और राजस्थान के दिवंगत मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि भैरोंसिंह शेखावत, पूर्व मुख्यमंत्री हरिदेव जोशी के अस्पताल में भर्ती होने के दौरान उनसे मिलने रोज जाते थे, भले ही दोनों नेता अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं से जुड़े रहे हों। राजे ने कहा कि यही वजह है कि राजनीति में व्यक्तिगत संबंधों को खराब नहीं करना चाहिए, चाहे वैचारिक मतभेद कितने भी गहरे क्यों न हों।
गौरतलब है कि विधानसभा के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में प्रदेश के वर्तमान और पूर्व विधायकों का बड़ा जमावड़ा देखने को मिला। इस ऐतिहासिक आयोजन में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी सहित प्रदेश की राजनीति से जुड़े कई शीर्ष नेता शामिल हुए। कार्यक्रम में 237 पूर्व विधायक, 163 वर्तमान विधायक, दो राज्यपाल और दो पूर्व स्पीकर सहित कुल 410 नेता एक साथ मौजूद रहे, जो अपने आप में एक ऐतिहासिक पल था।
बुजुर्ग नेताओं का सम्मान
इस अवसर पर 101 वर्षीय पूर्व विधायक पंडित रामकिशन का विशेष सम्मान किया गया, जिसमें वसुंधरा राजे सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने प्रोटोकॉल की औपचारिकता को दरकिनार करते हुए मंच पर पहुंचकर उन्हें सम्मानित किया। बुजुर्ग नेता के सम्मान में नेताओं का यह जज्बा देखकर सदन में मौजूद लोगों में भावुकता का माहौल बन गया।
कार्यक्रम के दौरान वसुंधरा राजे सहित कई पूर्व और वर्तमान नेताओं ने विधानसभा की गरिमा, लोकतांत्रिक परंपराओं और राजनीति में आपसी सौहार्द बनाए रखने पर विशेष जोर दिया। पूर्व मुख्यमंत्री के इस बयान को राजनीतिक हलकों में एक सकारात्मक संदेश के रूप में देखा जा रहा है, खासकर ऐसे दौर में जब राजनीतिक विरोधियों के बीच कटुता की खबरें आम हो चली हैं।