सीमावर्ती क्षेत्रों में धार्मिक ढांचों को हटाने के खिलाफ दायर याचिकाएं हाईकोर्ट ने की खारिज
फ्राइडे संवाद. जयपुर
राजस्थान हाईकोर्ट ने सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थित मस्जिदों, दरगाहों और मदरसों को हटाने के खिलाफ दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया है। हालांकि, कोर्ट ने निर्देश दिया कि संवेदनशील मामलों की अलग से जांच के लिए एक कमेटी बनाई जाए। सोमवार को इस मामले पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) का दायरा और उसकी ताकत बढ़ाने का केंद्र सरकार का फैसला देश की सुरक्षा के लिए एक ‘सोचा-समझा कदम’ है। कानूनी मामलों की वेबसाइट ‘बार एंड बेंच’ के मुताबिक, कोर्ट ने माना कि बॉर्डर के इलाकों में सुरक्षा की चिंताएं सबसे ऊपर हैं। याचिकाओं को खारिज करने के साथ ही हाईकोर्ट ने एक अहम निर्देश भी दिया। कोर्ट ने कहा कि जो संपत्तियां संवेदनशील हैं, उनके मामलों को एक-एक करके देखा जाएगा।
स्थानीय निवासियों ने कार्रवाई का किया था भारी विरोध
मालूम हो कि राजस्थान के सीमावर्ती जिलों जैसलमेर, बाड़मेर और बीकानेर में प्रशासन द्वारा ‘ऑपरेशन क्लीन’ के तहत मस्जिदों, मजारों और मदरसों पर बुलडोज़र चलाए थे। इस कार्रवाई ने पूरे थार क्षेत्र में जबरदस्त आक्रोश पैदा कर दिया था। स्थानीय निवासियों, विपक्षी नेताओं और सामाजिक संगठनों ने एकजुट होकर इस कार्रवाई का भारी विरोध भी किया था। इस कार्रवाई की पृष्ठभूमि में मई 2026 में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का बीकानेर दौरा बताया गया, जिसमें उन्होंने जिला कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों के साथ बॉर्डर क्षेत्र में अवैध अतिक्रमण हटाने के दिशा-निर्देश जारी किए थे। इसके बाद बाड़मेर प्रशासन ने सीमा से सटे इलाकों में सर्वे कर रिपोर्ट तैयार की और कार्रवाई शुरू की थी।
इस मुद्दे पर राजस्थान की राजनीति भी गरमा गई थी। कार्रवाई पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा था कि एक शांत सीमांत क्षेत्र में एक विशिष्ट धर्म को लक्षित कर की गई यह कार्रवाई राजनीतिक ध्रुवीकरण पैदा करने और सामाजिक ताने-बाने को बिगाड़ने के उद्देश्य से प्रेरित प्रतीत होती है। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्रालय से अपनी स्थिति स्पष्ट करने की मांग करते हुए कहा था कि सीमावर्ती क्षेत्रों में अमन-चैन बनाए रखना सरकार का संवैधानिक दायित्व है।