मानसून सत्र में प्रस्तावित विधेयकों का कांग्रेस करेगी पुरजोर विरोध, विपक्षी एकजुटता पर रहेगा जोर
नई दिल्ली। संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि केंद्र सरकार जिन प्रमुख विधेयकों को सदन में लाने की तैयारी कर रही है, उनका पार्टी मजबूती से विरोध करेगी। कांग्रेस महासचिव एवं संचार प्रभारी जयराम रमेश ने गुरुवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि पार्टी की बैठक में सरकार के संभावित विधायी एजेंडे पर विस्तृत चर्चा की गई। इस दौरान तय किया गया कि विपक्षी दलों के साथ मिलकर संसद के भीतर और बाहर इन प्रस्तावों का विरोध किया जाएगा। जयराम रमेश ने कहा कि सरकार एक बार फिर परिसीमन (डिलिमिटेशन) से जुड़े विधेयक को संसद में लाने का प्रयास कर सकती है। उन्होंने दावा किया कि 17 अप्रैल को सरकार इस विषय पर आवश्यक दो-तिहाई बहुमत जुटाने में सफल नहीं हो सकी थी, लेकिन अब वह इसे दोबारा पेश करने की तैयारी कर रही है। कांग्रेस पहले भी इस प्रस्ताव का विरोध कर चुकी है और आगे भी अपना रुख बरकरार रखेगी। उन्होंने बताया कि बैठक में न्यायाधीशों को हटाने से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक पर भी चर्चा हुई। इस विधेयक की जांच के लिए गठित संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) का विपक्ष पहले ही बहिष्कार कर चुका है। कांग्रेस का कहना है कि यदि यह विधेयक आगे बढ़ाया गया तो उसका भी कड़ा विरोध किया जाएगा। कांग्रेस नेता ने कहा कि ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ प्रस्ताव पर भी पार्टी का विरोध कायम रहेगा। इस विषय पर गठित जेपीसी को 10 अगस्त तक अपनी रिपोर्ट सौंपनी है, लेकिन कांग्रेस का मानना है कि यह प्रस्ताव देश की संघीय व्यवस्था और लोकतांत्रिक ढांचे के लिए उचित नहीं है।