पश्चिम एशिया में तनाव बरकरार, ईरान अड़ा, इजराइल का सैन्य मौजूदगी बढ़ाने का ऐलान
कतर। अमेरिका के साथ करीब छह महीने से जारी युद्ध के बाद ईरान ने अपना रुख और सख्त कर दिया है। सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के नए सचिव मोहसिन रजाई ने चीन के राजदूत कोंग पेइवू से मुलाकात के तुरंत बाद स्पष्ट किया कि जब तक अमेरिका युद्ध और नाकाबंदी खत्म नहीं करता, ईरान की जब्त संपत्तियां वापस नहीं करता और लेबनान व गाजा सहित पूरे क्षेत्र में संघर्षविराम पर सहमत नहीं होता, तब तक होरमुज जलडमरूमध्य नहीं खुलेगा। रजाई ने कहा कि जब तक सभी शर्तें पूरी नहीं होतीं, यह जलमार्ग बंद रहेगा। इससे पहले उन्होंने चीन के साथ करीबी रिश्तों की वकालत करते हुए कहा कि ओमान के साथ जो संभावित समझौता होरमुज को लेकर तय हुआ है, उसका अमेरिका से कोई लेना-देना नहीं। हालांकि यह समझौता अभी लागू होता नहीं दिख रहा, क्योंकि होरमुज के साथ-साथ लाल सागर और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य में भी सैन्य गतिविधियां जारी हैं। रविवार रात ओमान तट के पास एक मालवाहक जहाज पर हमला हुआ, वहीं मंगलवार को ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में मिस्र के एक जहाज पर हालिया सबसे घातक हमला किया, जिसमें यमन की मान्यता प्राप्त सरकार के अनुसार छह लोगों की मौत हो गई।
पाकिस्तान की मध्यस्थता, इजराइल का सख्त रुख
इस बीच पाकिस्तान अमेरिका और ईरान को बातचीत की मेज पर लाने की कोशिश में जुटा है। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के अनुसार गृह मंत्री मोहसिन नकवी शांति प्रयासों के तहत तेहरान का दौरा कर चुके हैं, और 60 दिन की समझौता ज्ञापन की समयसीमा रविवार को खत्म होने वाली है। उधर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के हालात ‘ठीक चल रहे हैं’ और अमेरिकी सेना होरमुज जलडमरूमध्य पर ‘पूरी तरह नियंत्रण’ रखे हुए है। इजराइल की ओर से भी सख्ती जारी है। इजराइली रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने दक्षिणी लेबनान में सेना की अग्रिम चौकियों के दौरे के दौरान ऐलान किया कि इजराइल किसी भी सूरत में लेबनान, सीरिया और गाजा के कब्जे वाले इलाकों से पीछे नहीं हटेगा और सेना वहां अनिश्चितकाल तक तैनात रहेगी। इजराइल फिलहाल दक्षिणी लेबनान, गाजा पट्टी के आधे से ज्यादा हिस्से और सीरिया की सबसे ऊंची चोटी जबल अल-शेख सहित कई रणनीतिक ठिकानों पर काबिज है। इजराइली सेना ने एक हफ्ते से ज्यादा समय बाद गाजा पर पहला हमला भी किया, वहीं संघर्षविराम के बावजूद दक्षिणी लेबनान में बमबारी और विध्वंस जारी रखा।
जर्मनी के पूर्व राजदूत की आलोचना
इजराइल में जर्मनी के पूर्व राजदूत स्टेफन जाइबर्ट ने भी कब्जे वाले वेस्ट बैंक में इजराइली बस्ती नीति को ‘विनाशकारी’ करार देते हुए तीखी आलोचना की है। जर्मन साप्ताहिक ‘डाइ त्साइट’ से बातचीत में जाइबर्ट ने कहा कि फिलिस्तीनी क्षेत्र में इजराइल की नीति ‘मनोवैज्ञानिक और शारीरिक हिंसा के जरिए विस्थापन’ के समान है। पूर्व चांसलर एंजेला मर्केल के प्रवक्ता रह चुके जाइबर्ट ने कहा कि इजराइल की सुरक्षा के प्रति जर्मनी की प्रतिबद्धता उसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सीमाओं के भीतर लागू होती है, लेकिन यह जॉर्डन घाटी में बसे बसने वालों पर लागू नहीं होती।
यूरोविजन के नियमों में भी बदलाव
पश्चिम एशिया के इस तनाव का असर सांस्कृतिक मंचों पर भी दिखा है। यूरोविजन सॉन्ग कॉन्टेस्ट के आयोजकों ने अगले साल की प्रतियोगिता के नियमों में बदलाव करते हुए तय किया है कि अगर किसी विजेता प्रसारणकर्ता का देश ‘सशस्त्र संघर्ष’ या ‘संवेदनशील भू-राजनीतिक स्थिति’ में शामिल है, तो वह अगली प्रतियोगिता की मेजबानी के लिए अपात्र होगा। यह फैसला तब आया जब स्पेन, नीदरलैंड, आयरलैंड और स्लोवेनिया ने गाजा युद्ध को लेकर इजराइल को बाहर करने की मांग करते हुए वियना में हुई 2026 की प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं लिया था। यूरोविजन के निदेशक मार्टिन ग्रीन ने कहा कि यह बदलाव सभी पक्षों को स्पष्टता देने, कलाकारों की सुरक्षा और प्रतियोगिता को सुरक्षित माहौल में जारी रखने के मकसद से किया गया है।