निकाह को आसान बनाना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी
फ्राइडे संवाद. सीकर | मौजूदा दौर में तालीम और तर्बियत के साथ-साथ समाज में निकाह को आसान बनाने पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। इस्लाम ने निकाह को सादगी और आसानी के साथ करने की शिक्षा दी है, लेकिन बदलते सामाजिक माहौल में महंगे और दिखावटी निकाह का चलन तेजी से बढ़ रहा है। कई परिवार सामाजिक दबाव और प्रतिष्ठा की होड़ में अपनी आर्थिक क्षमता से अधिक खर्च करने को मजबूर हो जाते हैं। इसके लिए उन्हें कर्ज लेना पड़ता है, कई बार ब्याज पर पैसा उठाना पड़ता है और कुछ परिवार जमीन-जायदाद तक बेचने को मजबूर हो जाते हैं।
मध्यवर्गीय परिवारों की स्थिति भी इससे अलग नहीं है। अनावश्यक रस्मों-रिवाज, खान-पान, कपड़ों और समारोहों की बढ़ती अपेक्षाओं ने निकाह जैसी पाकीजा और सरल प्रक्रिया को मुश्किल बना दिया है। इसका सबसे अधिक खामियाजा गरीब और कमजोर आर्थिक स्थिति वाले परिवारों को भुगतना पड़ता है। उनके सामने बच्चों की शादी एक जिम्मेदारी के बजाय आर्थिक बोझ बन जाती है।
जिम्मेदार और सक्षम लोगों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण
समाज में ऐसे परिवार भी हैं जो आर्थिक तंगी के बावजूद किसी से मदद मांगने में शर्म महसूस करते हैं। उनकी मजबूरी कई बार लोगों की नजरों से छिपी रह जाती है। ऐसे में समाज के जिम्मेदार और सक्षम लोगों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। जरूरतमंद परिवारों की मदद करना निश्चित रूप से नेक कार्य है, लेकिन मदद के बदले प्रचार, वाहवाही या अपना नाम सामने लाने की प्रवृत्ति पर भी विचार होना चाहिए। जिस परिवार की मदद की जा रही है, उसकी इज्जत और आत्मसम्मान का ख्याल रखना भी उतना ही जरूरी है। मदद ऐसी हो कि जरूरतमंद का हाथ थामे, लेकिन उसकी मजबूरी को सार्वजनिक न करे।
गुप्त सहायता जैसे कदम कारगर
समाज के जिम्मेदार लोगों, सामाजिक संगठनों और सक्षम परिवारों को आगे आकर सामूहिक रूप से सादगीपूर्ण निकाह को प्रोत्साहित करना चाहिए। अनावश्यक रस्मों पर रोक, सामूहिक निकाह की व्यवस्था और जरूरतमंद परिवारों की सम्मानजनक व गुप्त सहायता जैसे कदम इस दिशा में कारगर हो सकते हैं। मुस्लिम समाज के रिश्तों और पारिवारिक मूल्यों की मिसाल दूसरे समुदाय भी देते हैं। इस विरासत को बनाए रखने के लिए जरूरी है कि हम निकाह को दिखावे और आर्थिक बोझ से मुक्त कर उसे सादगी, सम्मान और आपसी सहयोग का माध्यम बनाएं। यह केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है।
— मोहम्मद तौफीक चौहान
निर्देशक, एआर मेमोरियल सीनियर सेकेंडरी स्कूल